जलस्तर बढने से पानी में डूबा पांडु नदी पर बना लकड़ी का जुगाड़ू पुल।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। बारिश से गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। गुरुवार शाम 6 बजे जलस्तर 110.560 मीटर रिकार्ड किया गया। चेतावनी बिंदु 112 मीटर और खतरा 113 मीटर के नजदीक है। ग्रामीणों में बाढ़ की आशंका को लेकर दहशत है। बढ़े जलस्तर से बीघापुर के पांडु नदी पर बना लकड़ी का पुल बह गया है। इससे ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कत हो रही है।
बीघापुर तहसील क्षेत्र की दो ग्राम सभाएं दूलीखेड़ा और लालाखेड़ा गंगा व पांडु नदी के बीच में बसी हुई हैं। दोनों ग्रामसभाओं के दर्जनों मजरों के लोगों ने पांडु नदी पर आवागमन करने के लिए लकड़ी का जुगाड़ पुल बना रखा था। मंगलवार से जलस्तर में बढ़ोत्तरी के बाद से जुगाड़ पुल का आगे का हिस्सा बह गया। अब ग्रामीण गले तक पानी मंझाकर पांडु नदी पार कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2009-10 में दूलीखेड़ा में पांडु नदी पर सुमेरपुर क्षेत्र पंचायत की ओर से पुल का निर्माण कराया गया था। तभी 3 माह बाद पांडु नदी में आई बाढ़ में पुल का कुछ हिस्सा बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने पुल के बह गए हिस्से पर लकड़ी का जुगाड़ पुल बनाकर 10 वर्षों तक आवागमन किया। पूर्व में अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों ने जुगाड़ पुल को तोड़ दिया था। कुछ दिन बाद फिर लोगों ने तोड़े गए पुल के बगल में ही लकड़ी का पुल बना लिया था। तब से इसी लकड़ी के पुल से आवागमन कर रहे थे। मंगलवार को जलस्तर बढ़ गया। परिणामस्वरूप जुगाड़ पुल का 10 मीटर हिस्सा भी बह गया। अब लोग नदी के बीच से आवागमन कर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता मन्नीलाल का कहना है कि पुल का निर्माण सेतु निगम को कराना है। बीच में कोरोना का संक्रमण बढ़ गया था। इससे काम शुरू नहीं हो पाया था।
शुक्लागंज में गुरुवार सुबह जलस्तर 110 मीटर पार करते ही गंगा के पानी ने आनंद घाट पर दस्तक दे दी। गंगा का जलस्तर शाम 6 बजे 110.560 मीटर पर पहुंच जाने से किनारे बसे रविदास नगर, शक्तिनगर व इंदिरानगर में रहने वाले लोगों में कटान को लेकर दहशत है। लोगों का कहना है कि यदि अब जलस्तर में एक मीटर की बढ़ोत्तरी हुई तो उनके मकान बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। वहीं सिंचाई विभाग द्वारा गुरुवार को जिओ बैग डालने का कार्य शुरू कराया गया। अधिकारियों का कहना है जिओ पैक डालने के साथ फटे हुए बैगों की मरम्मत कराई जा रही है। केंद्रीय जल आयोग का मानना है कि जलस्तर में अभी और बढ़ोत्तरी हो सकती है।