उन्नाव। प्रयागराज कुंभ से पहले गंगा को निर्मल करने की योजनाओं पर जिम्मेदार अमल नहीं कर रहे। हालत यह है कि शहर के नालों का पानी सीधे गंगा में गिरने से रोका नहीं गया। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बंद हैं और फैक्टरियों का दूषित पानी साफ करने के लिए दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में लगे कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) अपग्रेड नहीं हैं। इन सबके बाद भी अफसर कारखानों पर पाबंदी की तैयारी कर रहे हैं।
योजना-1
3.80 अरब की योजना चार साल से अधूरी
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) की सख्ती के बाद शहर और शुक्लागंज आबादी क्षेत्र के सीवर और गंदे पानी नालों का पानी सीधे गंगा नदी में जाने से रोकने की योजना चार साल बाद भी अधूरी है। शुक्लागंज नगर पालिका क्षेत्र के 28 वार्डों का गंदा पानी पांच नालों के माध्यम से गंगा नदी में सीधे गिराया जा रहा है। उन्नाव शहर और शुक्लागंज नगर पालिका क्षेत्रों के दूषित पानी और सीवरेज को गंगा में जाने से रोकने के लिए 2019 में केंद्र सरकार ने 3.80 अरब रुपये की परियोजना को मंजूरी दी थी, लेकिन शहर के कुछ भाग में सीवर लाइन और प्रस्तावित एक एसटीपी बना लेकिन अभी चालू नहीं हो पाया। शुक्लागंज में तीन में से केवल एक एसटीपी अभी 80 फीसदी बन पाया है।
योजना-2
दो महीने ही चला 122 करोड़ का एसटीपी
शहर और दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र से होकर गंगा नदी में गिरने वाली लोनी ड्रेन पर बना एसटीपी भी नहीं चल पा रहा है। सिटी ड्रेन से आधे शहर, अकरमपुर औद्योगिक क्षेत्र सहित आसपास के गांवों का गंदा पानी गिरता है। यह गंदा पानी अचलगंज के डकारी के पास नाले से गंगा में गिरता है। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए 122 करोड़ की लागत से डकारी के पास एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) अक्टूबर 2019 को बनना शुरू हुआ था और जनवरी 2024 में निर्माण पूरा हो पाया। करीब तीन महीने ही प्लांट चल सका। इस एसटीपी की 3.2 किलोमीटर पाइप लाइन सिल्ट से चोक हो गई है।
योजना-3
अपग्रेड नहीं हो सके सीईटीपी
एनजीटी के मानकों पर फेल बंथर औद्योगिक क्षेत्र के सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस कर जीरो डिस्चार्ज के अनुरूप अपग्रेड करने पर 111 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने एनएमसीजी (नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा) परियोजना के तहत 111 करोड़ से अपग्रेडेशन कार्य को मंजूरी दी थी। सितंबर 2022 में शुरू काम शुरू हुआ था लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है। वहीं, दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र का सीईटीपी को अपग्रेड करने का काम अभी शुरू ही नहीं हो सका है।
जिम्मेदारों की बात
एसटीपी के काम न करने से दोनों प्रमुख ड्रेनों का गंदा पानी साफ नहीं हो पा रहा है। कुंभ मेले के दौरान गंदा पानी गंगा में जाने से रोकने के लिए इन नालों में विभिन्न स्थानों पर बंधा बनाने पर विचार चल रहा है। सीईटीपी अपग्रेड न होने से कुंभ के स्नान पर्व से तीन दिन पहले से उत्प्रवाह वाली (पानी बहाने वाली) इकाइयों से पानी बहाने पर रोक लगाई जाएगी। टेनरियों, स्लाटर हाउसों सहित अन्य कारखानों को इन तीन दिनों में सूखे काम कराने की ही छूट दी जाएगी। पाइप और नालों को बंद कर दिया जाएगा।
- रोहित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
डकारी एसटीपी को चालू करने का प्रयास किया जा रहा है। गंगा में बाढ़ के दौरान एसटीपी का पाइप सिल्ट की वजह से चोक हो गया था। 3.2 किलोमीटर लंबी लाइन का करीब 1000 मीटर हिस्सा साफ कर लिया गया है। बाकी को भी जल्द साफ कराया जाएगा।
- अमित कुमार, एक्सईएन जलनिगम
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अहमद नगर में पांच एमएलडी क्षमता का एसटीपी बन रहा है, जिसमें 15 फीसदी काम ही बचा है। वहीं, पांच-पांच एमएलडी क्षमता के दो और एसटीपी प्रस्तावित हैं। एसटीपी का काम पूरा होने के बाद आबादी क्षेत्र की जलनिकासी वाले नालों को इनसे जोड़ा जा सकेगा।
- अंकुर सक्सेना, जेई, सिंचाई विभाग