उन्नाव। राज्य पोषण मिशन की समीक्षा बैठक में न पहुंचने पर सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। बैठक में बताया गया कि बच्चों के विकास के लक्ष्य को बाल विकास विभाग पूरा नहीं कर सका है।
प्रदेश स्तर पर समीक्षा में बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की कमी सामने आई है। जानकारी दी गई कि स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए कुपोषण को समाप्त किया जा सकता है।
मुख्य विकास अधिकारी नेहा शर्मा ने कहा कि प्रदेश में पांच वर्ष से कम उम्र के आधे से अधिक बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण मातृ एवं शिशु कुपोषण है।
कुपोषण से प्रभावित जो बच्चे जीवित रहते हैं उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे बच्चे अक्सर बीमार रहते हैं और उनका पूरा विकास नहीं हो पाता है।
इस दौरान एनजीओ वात्सल्य की सचिव डॉ. नीलम ने बताया कि जनपद में लगभग एक लाख बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। जिनमें से 2224 बच्चे अतिकुपोषित हैं।
दिसंबर 14 में अब तक 191 बच्चों को अतिकुपोषित श्रेणी से मुक्त कराया गया है। शेष को जून 15 तक मुक्त करा लिया जाएगा। बैठक में एसडीएम पुरवा जसजीत कौर, जिला कार्यक्रम अधिकारी शीरी मसूद, मनरेगा उपायुक्त राजेश कुमार मिश्र, एक्सईएन विद्युत द्वितीय रामबुझारत, डीडीओ एनबी सविता समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।