जिले में बुखार के हमले ने हाहाकार मचा दिया है। शुक्रवार को मौरांवा में बुख्रार से छह साल के बच्चे और औरास में आठ साल के बच्चे की मौत हो गई। उधर एक सप्ताह में बांगरमऊ में पांच लोगों की मौत ने लोगों की नींद उड़ा दी है। जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों के बेड मरीजों से भरे पड़े हैं। जिला अस्पताल की हालत यह है कि मरीजों की संख्या बढ़ने पर वार्डों में अक्सर फोल्डिंग डाली जाती हैं। एक बेड पर दो-तीन मरीजों का इलाज करने की मजबूरी है। सरकारी व्यवस्था यह कि दवाओं तक का अकाल है। डेंगू के बुखार में सबसे कारगर दवा पैरासिटामाल टेबलेट एक सप्ताह से खत्म हैं। यही स्थिति औरास समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की है। जिले में इस समय वायरल फीवर का जबरदस्त प्रकोप दिख रहा है लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को देने के लिए पर्याप्त दवा नहीं है। सीएओ डाक्टर भूपेंद्रनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि मई महीने में पैरासिटामाल की 10 लाख टैबलेट मांगी गईं, लेकिन केवल केवल पांच लाख मिलीं और अगस्त में 10 लाख टैबलेट और मांगी गईं अब तक केवल दो लाख टैबलेट ही मिल पाई हैं।
लोगों में दहशत, मरीजों को ट्रामा सेंटर कर रहे रेफर
औरास/मौरावां। दो अलग-अलग स्थानों पर बुखार से दो और बच्चों की मौत हो गई। औरास कसबा निवासी गोपाल के आठ साल के बेटे शुभ (8) को चार दिन से तेज बुखार आ रहा था। गोपाल ने बेटे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर डाक्टरों ने ट्रामासेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। शुक्रवार को इलाज दौरान उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। परिवार के लोग डेंगू से मौत होने की आशंका जता रहा है। उधर, मौरावां में हफ्ते भर से बुखार से पीड़ित लऊवा मटेहना गांव निवासी कमलेश यादव के छह साल के बेटे कुनाल लखनऊ ट्रामासेंट्रर में इलाज के दौरान मौत हो गई। कमलेश के अनुसार छह दिन पहले बुखार आने पर कुनाल को नर्सिंगहोम में भर्ती कराया। बाद में ट्रामासेंटर में भर्ती कराया। डाक्टरों के अनुसार तब तक काफी देर हो चुकी थी।
एमोक्सी, सेप्ट्रान, सिप्लाक्स, यीस्ट जैसी अहम दवाएं नहीं
औरास प्रतिनिधि के अनुसार पीएचसी में मरीजों के अनुपात में दवाओं की उपलब्धता नहीं बढ़ी। पैरासिटामाल के अलावा एमोक्सी, सेप्ट्रान, सिप्लाक्स, यीस्ट जैसी अहम दवाएं नदारत हैं। नवाबगंज स्वास्थ्य केंद्र का भी यही हाल है डाक्टरों का कहना है बुखार की जितनी दवा उनके पास बची है उससे केवल तीन-चार दिन ही काम चल पाएगा।
पैरासिटामाल की पांच सौ गोलियां बची
बीघापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। सामान्य दिनों में औसतन 60 मरीज ओपीडी में आते थे, लेकिन इन दिनों संख्या 150 से ऊपर पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. पंकज ने बताया कि ज्यादातर मरीज वायरल संक्रमण के हैं। जो बुखार, उल्टी और दस्त से परेशान हैं। स्वास्थ्य केंद्र में बुखार के लिए महत्वपूर्ण दवा पैरासिटामाल लगभग खत्म होने को हैं। अब केवल पांच सौ गोलियां ही बची हैं।
तो क्या डाक्टर की सूरत देख मर्ज जाएगा
सफीपुर सीएचसी में मरीजों की भीड़ तो है लेकिन दवाएं नहीं है। और तो और बुखार और दर्द की भी दवा न होना मरीजों के लिए मुसीबत बना है। सीएचसी में मौजूदा समय में 250 मरीज प्रतिदिन देखे जाते है। लेकिन जरूरी दवाएं न होने से मरीजों को बाहर से खरीदकर लानी पढ़ती है। अब तो मरीज ही सीएचसी से किनारा करने लगे हैं। मरीजों का कहना है की दवा नहीं तो क्या डाक्टर की सूरत देख मर्ज जाएगा।