पुरवा बूथ पर 109 साल की रामरती मतदान करने पहुंची तो अधिकारी से लेकर एजेंट तक उनके हौसले को सलाम करने से खुद को रोक न सके। सभी की जुबां पर बस एक ही बात थी कि वोट की अहमियत क्या है, कोई इस बुजुर्ग मां से समझे। बुजुर्ग शरीर से तो अपने को लाचार महसूस कर रही थी। मगर हौसले किसी मजबूत चट्टान से कम नहीं। कुछ इस तरह जिले की 90 साल की मैका, 85 वर्षीय रूपरानी के अलावा और भी थी। जिन्होंने महापर्व में भागीदारी कर एक ऐसी मिशाल पेश की कि हर कोई इनके जज्बे को सलाम कर रहा था।
बांगरमऊ के राजेपुर निवासी कन्हैया बाजपेई की पत्नी चिमैरा देवी शरीर से बेबस हैं, मगर वोट करने में कोई चूक नहीं की। कंपकंपाते हाथ, कमजोर शरीर वाली चिमैरा देवी बेटों के साथ बूथ पर पहुंची तो बीएसएफ के जवानों ने सहारा देकर पोलिंग बूथ के भीतर पहुंचाया। वहीं मोहान की रहने वाली 90 वर्षीय मैका पर भी उम्र की बंदिश हावी नहीं दिखी। मतदान कर बाहर निकली मैका जोश से लबरेज होकर बोली वोट कबहुं खराब नहीं कीन है।
तो वहीं जीवन के अस्सी बसंत पार कर चुकीं चमियानी बीघापुर की रहने वाली रूपरानी ने मतदान कर युवाओं को आईना दिखाया कि एक-एक वोट कितना महत्वपूर्ण होता है। चिमैरा देवी की तरह कई ऐसे लोग थे जो बिना सहारे के चल नहीं सकते। बुढ़ापे में हाथ-पांव ने साथ देना बंद कर दिया, लेकिन लोकतंत्र में अटूट विश्वास का ही नतीजा था कि जो वह अपनों का सहारा लेकर बूथ तक पहुंचे और मतदान किया।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांग व वृद्ध लोग मतदान में किसी से पीछे नहीं रहे। कई लोग तो खुद ही बैसाखी या फिर लाठी के सहारे बूथ तक पहुंचे और बातचीत में वोट जरूर करने की बात कही। पुरवा कस्बा निवासी बब्लू हलवाई जन्म से दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। मगर वोट देने की बारी आई तो वह अपने भाई राजू के साथ बाइक से पोलिंग सेंटर पहुंच गए। भाई की मदद से उन्होंने अपना वोट डाला। यहां तैनात पुलिस जवानों ने भी उनकी मदद की।