शहर में कूड़ा निस्तारण और डंपिंग ग्राउंड की समस्या से जूझ रही नगर पालिका तो शहर में खुद ही जगह-जगह कूड़ा जलवा रही है। शहर के मोहल्ला दारोगाबाग, हरदोई बाइपास मार्ग और हाईवे के किनारे नगर पालिका कूड़ा फेंकवाती है। नगर पालिका कर्मी हर रोज इसमें आग लगाकर जला देते हैं। इसके बाद यह इससे उड़ता धुंआ हवा के साथ बस्ती के बीच फैलता है और लोगों को बीमार करता है। तमाम दावों के बावजूद उन्नाव नगर पालिका कूड़ा-कचरा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर पाया है। नगर पालिका के मुताबिक शहर में प्रतिदिन करीब 50 मीट्रिक टन कूड़ा-कचरा निकलता है। इसे निस्तारित करने के लिए कोई स्थान न होने से शहर में हरदोई रोड, दोस्तीनगर बाईपास मार्ग, हाईवे, कानपुर रोड और उन्नाव-रायबरेली मार्ग के किनारे कई स्थानों पर प्रतिदिन कई मीट्रिक टन कूड़ा-कचरा फेंका जाता है। कचरे की दुर्गंध और जलाए गए कूड़े के धुएं से लोग बीमार होते हैं। फरवरी 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जिले का निरीक्षण किया था। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर देखकर शहर में कूड़ा डंपिंग ग्राउंड बनाने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों ने शहर में तीन स्थान अकरमपुर, गदनखेड़ा व काशीराम कालोनी को कूड़ा डंपिंग ग्राउंड के लिए स्थल चयन भी किया था। लेकिन पांच साल बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। हालत यह है कि सुबह झाड़ू लागने के बाद सफाई कर्मी शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर जलाते हैं वही ट्रालियों और डंपर से लादकर सड़कों के किनारे फेंका गया कूड़ा जब सड़क तक फैलने लगता है तो नगर पालिका उसे खुद ही जलवाता है। एनजीटी ने ठोस कचरा अधिनियम 2016 को पहली जनवरी से छह माह के भीतर शत प्रतिशत क्रियान्वयन को कहा है।
क्या बोले जिम्मेदार......
नगर पालिका के प्रभारी ईओ पीके जौहरी ने बताया कि उन्हें एनजीटी का ऐसा कोई आदेश अभी तक नहीं मिला है। आदेश मिलने पर उसका पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि नगर पालिका कर्मियों को भी ऐसा करने से रोका जाएगा।