खाद्य एवं औषधि प्रशासन के मुख्य खाद्य निरीक्षक केके त्रिपाठी के नेतृत्व में मई माह में दूषित पानी के खिलाफ अभियान चलाया गया था। 20 मई 2016 को फतेहपुर चौरासी के सरहा निवासी गोपाल तिवारी के यहां अधिकारियों ने छापा मारा था। गोपाल तिवारी एक्वा गोल्ड के नाम से पैकेज ड्रिकिंग वाटर का काम करते थे। वह मशीन लगाकर पानी के पाउच तैयार करा बिक्री कराते थे।
इसी तारीख को बांगरमऊ निवासी सौरभ कुमार गुप्ता के यहां भी छापेमारी हुई थी। यह भी आशना ब्रांड नाम से बोतलबंद पानी की बिक्री करते थे। इसके अलावा 11 मई 2016 को खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने शहर के पीतांबर नगर स्थित शुभम अल्ट्रा प्योर ड्रिंकिंग वाटर कंपनी में छापा मारा था। इसके संचालक विश्वनाथ तिवारी पानी के पाउच बनाकर उसका व्यापार करते थे।
अधिकारियों ने तीनों कंपनियों से बेचे जा रहे पानी का सैंपल भरकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। इनकी जांच रिपोर्ट अब आई है। प्रयोगशाला की ओर से पानी के सैंपलों को पीने योग्य नहीं बताया गया है। सभी नमूने जांच में अधोमानक (मानक के अनुरूप नहीं) पाए गए हैं। साथ में पाउच व बोतल में जो जानकारी कंपनी की ओर से प्रिंट की गई थी वह भी गलत पाई गई।
मुख्य खाद्य निरीक्षक केके त्रिपाठी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर सभी संचालकों को नोटिस जारी की गई है। बताया कि शुभम अल्ट्रा की तो मशीनें जांच के दौरान 11 मई को ही सीज कर दी गई थी।
तीनों के पास नहीं मिला केंद्रीय प्रमाणपत्र
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियमों के अनुसार, जो भी व्यक्ति पानी का व्यवसाय करता है तो उसके पास केंद्रीय बीआईएस का प्रमाणपत्र होना चाहिए। यह प्रमाणपत्र केंद्र सरकार देती है। यदि पानी का व्यवसाय करने वाले के पास यह प्रमाणपत्र नहीं है तो वह यह व्यापार नहीं कर सकता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके त्रिपाठी के अनुसार, तीनों कंपनियों के पास यह प्रमाणपत्र नहीं मिला है। इसके लिए अलग से तीनों को नोटिस जारी की गई है।