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कानून व अनुशासन की पाठशाला दोनो तार-तार

Tue, 01 Mar 2016 12:31 AM IST
अमर उजाला, उन्नाव
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दूसरों को कानून का पालन कराने वाले भावी दरोगा ही कानून का उल्लंघन करने लगें तो जनता को कानून का पाठ कैसे पढ़ाएंगे। यह कहना है उन पुलिस अधिकारियों का जिन्हें घटना के बाद मौके पर भेजा गया था। कई पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नाराजगी व्यक्त करने का जो तरीका प्रशिक्षुओं ने अपनाया वह किसी भी हालत में क्षम्य नहीं है। उनका कहना है कि रात का समय न होता तो सभी को ऐसा सबक सिखाते कि जीवन भर के लिए अनुशासन सीख जाते। हालांकि एडीजी ट्रेनिंग गहन जांच और कड़ी कार्रवाई की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी यहां हुआ है उसे कभी नजर अंदाज या माफ नहीं किया जाता। कहा कि बात कहने और विरोध के और भी तरीके होते हैं।
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अनुशासन और आईपीसी का ज्ञानार्जन करने के लिए आए प्रशिक्षुओं ने पांच घंटे ट्रेनिंग सेंटर में घंटो हंगामा, लूटपाट के साथ ही तोड़फोड़ का प्रयास, वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करने वाले प्रशिक्षुओं को काबू करने के लिए एसपी नेहा पांडेय स्वयं मौके पर पहुंचीं थीं और उन्होंने कई थानों की फोर्स के साथ ही दमकल और पुलिस लाइन से भी भारी संख्या में फोर्स रात करीब एक बजे मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने घेराबंदी शुरू की मगर रात का अंधेरा होने और दोनो और वाहनों की कई किमी लंबी लाइन लगे होने से पुलिस प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाई। हालांकि दबाव बनाने के लिए पुलिस ने कई राउंड हावाई फायरिंग की थी। इसी दौरान एडीजी के समझाने के बाद ट्रेनी दरोगा जाम खोलने को तैयार हो गए और कुछ ही देर में सभी सड़क से हट गए।

एडीजी ट्रेनिंग ने शुरू की जांच
फतेहपुर चौरासी। पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में फूड प्वाइजनिंग, अधिकारियों के खिलाफ बगावत और जाम प्रदर्शन की घटना की जांच करने पहुंचे एडीजी ट्रेनिंग वीके मौर्य ने बताया कि पीटीसी में मौजूदा समय में कुल 800 प्रशिक्षु दरोगा की ट्रेनिंग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि 400 दरोगा की ट्रेनिंग पहले से चल रही है जबकि इसी महीने 6 फरवरी को इलाहाबाद, मुरादाबाद, चुनार और गोरखपुर से 400 और ट्रेनी  आए हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षुओं में हर तरह के बच्चे होते हैं। उन्होंने माना कि घटना ऐेसी है कि जिसकी फोर्स में गंभीर अनुशासन हीनता माना जाता है। बताया कि वह जांच कर रहे हैं कि आखिर हालात इतना ज्यादा कैसे बिगड़े। उन्होंने वाहनों में तोड़फोड और पीडीसी में अधिकारियों के आवास व अन्य इमारत में तोड़फोड़ करने की घटना से इनकार किया है। एडीजी ने बताया कि पूरे मामले की गहन पड़ताल चल रही है।
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इनसेट
प्रशिक्षुओं के आरोप
प्रशिक्षणार्थियों का आरोप है कि घर में जरूरी काम या किसी के बीमार होने पर भी छुट्टी नहीं दी जाती।
एक रूम में 12 लोगों के रहने की व्यवस्था, रखे जा रहे 17-18 प्रशिक्षु।
गांवों से खुला व पानी मिला दूध दिया जाता है, पैकेट बंद दूध की मांगने पर सजा।
प्रशिक्षण दे रहे अधिकारियों की बात करने का लहजा ठीक नहीं है।
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