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आलू में झुलसा रोग से मुरझाए किसानों के चेहरे

Fri, 29 Jan 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
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कड़ाके की ठंड ने भले ही गेहूं उत्पादक किसानों के चेहरे खिला दिए हों, लेकिन आलू किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं। मौसम में नमी और ठंड के मिश्रण से आलू की फसल में झुलसा रोग लग गया है। इसने फसल को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। इससे किसान आलू के फसल का उत्पादन गिरने की आशंका जताने लगे हैं।
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इस बार जिले में 9700 हेक्टेअर में आलू बोई गई है। उद्यान विभाग ने दो लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन का लक्ष्य रखा गया, लेकिन मौसम प्रतिकूल होने से आलू की फसल में लगे झुलसा रोग से उत्पादन गिरने का अनुमान लगाया जा रहा है।


 वर्तमान समय में पड़ रही कड़ाके की ठंड और नमी के कारण आलू की फसल के लिए वर्तमान मौसम प्रतिकूल साबित हो रहा है। इसके चलते आलू की फसल में झुलसा रोग फैल गया है।
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स्थिति यह है कि गंजमुरादाबाद, औरास, बांगरमऊ, सफीपुर, नवाबगंज, असोहा, मौरावां, बीघापुर आदि क्षेत्रों में इस रोग की चपेट में आकर पूरे-पूरे खेत की फसल नष्ट हो गई है। इसको देखते हुए लागत मूल्य तक नसीब नहीं हो पाने की आशंका से किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं।


बताते चलें कि जिले में रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की ही तरह भारी पैमाने में आलू की फसल बोई जाती है।

 
जानकार बताते हैं कि मौसम अनुकूल न होने से आलू में झुलसा रोग लगने के बाद से पौधे की पत्ती झुलस जाती है। बाद में धीरे-धीरे यह रोग पूरे पौधे और पूरे खेत को अपनी चपेट में ले लेता है। इससे पूरा पौधा ही नहीं पूरा खेत नष्ट हो जाता है।


ऐसे पौधे में फसल नहीं लगती है, यहां तक कि पूरे खेत रोग ग्रसित होकर नष्ट हो रहे हैं। इससे किसानों को लागत मूल्य तक निकल पाना मुश्किल लग रहा है।

 
यह सोचकर किसानों के अपेक्षित फसल न उत्पन्न होने की आशंका से चेहरे मुरझाने लगे हैं। अपर जिला उद्यान अधिकारी आरबी वर्मा ने माना कि झुलसा रोग लगने से आलू का उत्पादन गिर सकता है। बताया कि मौसम प्रतिकूल होने से यह समस्या दिख रही है।

 

कीटनाशकों का प्रयोग कर बचाएं फसल- अपर जिला कृषि रक्षाधिकारी बृजेश विश्वकर्मा ने बताया कि मौसम में आर्र्दता (नमी) ज्यादा होने और कड़ाके की ठंड से आलू में झुलसा रोग लग गया है।



उन्होंने आलू में झुलसा रोग के नियंत्रण के लिए किसानों को सुझाव दिया है कि वह मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी की दो किलोग्राम मात्रा को लगभग 800 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेअर आलू की फसल का छिड़काव करें।



10-12 दिन के बाद पुन: कापर ऑक्सी-क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूपी 2.5 किग्रा. मात्रा को 800 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेअर आलू की फसल पर छिड़काव करें। बताया कि किसी भी रसायन के फसल पर प्रयोग से पूर्व किसान कृषि रक्षा विशेषज्ञ से सलाह अवश्य ले लें।



किसान परेशान, कैसे निकलेगी लागत- गंजमुरादाबाद (उन्नाव)। क्षेत्र में बोई गई आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में आ गई है।



क्षेत्र के रामकुमार, अनूप कुमार, अवधेश कुमार, संतराम,  ठाकुर प्रसाद आदि किसानों ने बताया कि उन्होंने महंगा बीज खरीदकर आलू की बुआई की थी। इसके अलावा खाद और सिंचाई की समुचित व्यवस्था की, लेकिन मौसम की मार के चलते फसल झुलसा रोग की चपेट में आ गई है। इससे पूरी फसल नष्ट होने की कगार पर है।


इससे उन्हें अब लागत मूल्य तक नसीब होने की उम्मीद नहीं है। राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी देवी सिंह ने बताया कि यदि समय रहते इस रोग का उपचार हो जाय तो फसल को आसानी से बचाया जा सकता है।
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