उन्नाव। जिला और क्षेत्र पंचायत चुनाव के मैदान में उतर चुके या किस्मत आजमाने का मन बना चुके राजनीतिक दलों के एक से अधिक कार्यकर्ताओं को मैनेज करने के लिए पार्टी नेताओं को पंचायत लगानी पड़ रही है। कोई आसानी से मान रहा तो है तो कोई पार्टी और क्षेत्र के लिए किए गए योगदान की दुहाई देकर मौका न छोड़ने की जिद पर अड़ा है।
जिला पंचायत सदस्य की 53 और क्षेत्र पंचायत सदस्य की 1319 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही विभिन्न दलों के कार्यकर्ता चुनाव मैदान में उतर आए हैं। हालत यह है कि एक ही दल के चार से पांच कार्यकर्ता छोटी संसद के चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने का मन बना चुके हैं। कई तो पहले ही चरण में नामांकन भी करा चुके हैं। कार्यकर्ताओं की जिद पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों के लिए मुसीबत बन गई है।
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए दल अपने कार्यकर्ताओं को नाराज भी नहीं करना चाहते और कमजोर प्रत्याशी को पार्टी का समर्थन देकर चुनावी शिकस्त का मुंह भी नहीं देखना चाहते। कार्यकर्ताओं की जिद से परेशान विधायक और पार्टी के पदाधिकारी पंचायत चुनाव के इन उम्मीदवारों को एक साथ बैठाकर सुलह-समझौता कराने के लिए पंचायत कर रहे हैैं।
नेता जिताऊ प्रत्याशियों को पार्टी का समर्थन दिलाकर भविष्य में होने वाले जिला पंचायत व क्षेत्रपंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अपने खास को बैठाने की कोशिशों में लगे हैं। सत्तादल के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिन सीटों के लिए एक से अधिक कार्यकर्ता अपनी दावेदारी से पीछे नहीं हट रहे हैं वहां किसी को पार्टी का समर्थित प्रत्याशी घोषित न कर सबको मौका देने और जीतने वाले को अपने पाले में लाने की बात कही। सपा, भाजपा, कांग्रेस हो या फिर बसपा सभी दलों के नेता इन दिनों कार्यकर्ताओं की पंचायत करने में व्यस्त हैं।