ज्येष्ठ की अमावस्या पर आज महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना करेंगी। व्रत की पूर्व संध्या पर महिलाओं ने बाजार जाकर आवश्यक सामान की खरीदारी की।
शुक्रवार को वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा। व्रत के पीछे मान्यता है कि पूर्व काल में सत्यवान की मृत्यु हो जाने पर जब उसके प्राण लेकर यमराज जाने लगे तो सावित्री पीछे-पीछे चल दी।
जब यमराज ने वापस जाने को कहा तो वह बिना पति के जाने को तैयार नहीं हुई। यमराज ने उससे वरदान मांगने को कहा। जिस पर उसने पहले अपने अंधे सास-ससुर की आंखें और दूसरा उनका खोया राज्य वापस मांगा। यमराज ने तथास्तु कह दिया, इसके बाद फिर सावित्री यमराज के पीछे चल दी। कुछ दूर आगे निकलने पर यमराज ने पीछे मुड़कर देखा तो सावित्री आते दिखी।
यमराज ने फिर वरदान मांगने को कहा तो उसने पुत्रवती होने का आशीर्वाद मांगा। यमराज ने भी तथास्तु कह दिया। बाद में जब सोचा तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ इस पर उन्होंने उसके पति के प्राणों को छोड़ दिया। तभी से इस व्रत की परंपरा है।
इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करके परिक्रमा लगाती हैं। गुरुवार को बड़े, छोटे व सब्जी मंडी के पास लगी दुकानों पर पहुंचकर महिलाओं ने चूड़ी, कच्चा धागा, खरबूजा समेत अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदारी की।