उन्नाव। आंखों की जांच में प्रयोग होने वाली बी-स्कैन मशीन का पीसीपीएनडीटी एक्ट में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। अभी तक अल्ट्रासाउंड मशीन का ही पंजीकरण एक्ट के तहत किया जा रहा था। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार भ्रूण जांच में बी-स्कैन मशीन के प्रयोग की शिकायतें मिलने पर शासन ने नियम में बदलाव किया है। जल्द ही आई सेंटर के संचालकों को निर्देश जारी कर मशीन का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
जिले गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक(लिंग चयन प्रतिशेष) अधिनियम 1994 के तहत भ्रूण के लिंग की जांच करना अपराध है। सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह भ्रूण के लिंग की जांच न करें। लोगों को जागरुक करने के लिए सेंटर के बाहर प्रचार प्रसार भी किया जाए। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत स्वास्थ्य अधिकारी गोपनीय तरीके से अल्ट्रासाउंड सेंटरों का निरीक्षण भी करते हैं। जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि किसी सेंटर पर भ्रूण की जांच तो नहीं की जा रही। पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ. तन्मय कक्कड़ ने बताया कि अभी तक छह सरकारी व 24 निजी सेंटरों की अल्ट्रासाउंड मशीनें पंजीकृत हैं। शासन के निर्देश पर आई सेंटर संचालकों को बी स्कैन मशीन का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।
प्राब बदल होता है खेल
सूत्रों के अनुसार बी-स्कैन मशीन अल्ट्रासाउंड मशीन की तरह ही काम करती है। इस मशीन का प्राब बदलकर भ्रूण परीक्षण जैसा गलत काम किया जा सकता है। प्राब मशीन का वह हिस्सा है जिससे जांच होती है।
तीन साल की हो सकती है सजा
नोडल अधिकारी डॉ. तन्मय कक्कड़ ने बताया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन पर तीन से पांच साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा दस से 50 हजार रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान निर्धारित है। लिंग परीक्षण करते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने पर पीसीपीएनडीटी एक्ट के अलावा आईपीसी की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि भ्रूण लिंग की जांच करते पाए जाने पर पंजीकरण रद्द करने के साथ मशीन भी जब्त कर ली जाती है।