अलग-अलग थानाक्षेत्रों में पुलिस ने छापा मारकर दो अवैध असलहा कारखानों का भंडाफोड़ किया है। दोनों स्थानों से 24 तमंचे, कारतूस और असलहा बनाने के उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने असलहों का चुनाव के दौरान इस्तेमाल किए जाने का अंदेशा जताया है। इसकी जांच की जा रही है। गंगाघाट थानाक्षेत्र में खाली मकान में व असोहा में एक खंडहर में असलहे बनाने का काम चल रहा था।
गंगाघाट थानाक्षेत्र के मोहल्ला कटरी पीपरखेड़ा में खाली मकान में काफी समय से असलहा फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा था। पुलिस को जानकारी मिलने पर एसओ गंगाघाट अरुण कुमार द्विवेदी ने छापेमारी की। मौके से कानपुर देहात के शहबाजपुर रसूलाबाद निवासी अनूप सिंह, माखी थानाक्षेत्र के बिधनू निवासी देशराज रावत व हुलासखेड़ा निवासी सुनील रावत को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने 20 निर्मित व आधा दर्जन अधबने तमंचे बरामद किए हैं। इसके अलावा असलहा बनाने के उपकरण भी बरामद किए हैं। पकड़े गए तीनों अभियुक्तों पर अलग-अलग थानाक्षेत्रों में कई मुकदमे दर्ज हैं। एसपी नेहा पांडेय ने खुलासा करने वाली टीम में शामिल एसओ अरुण कुमार द्विवेदी व उनकी टीम की पीठ थपथपाई।
इसी तरह असोहा थानाध्यक्ष जेएन सिंह के नेतृत्व में एसआई योगेश दीक्षित, अमीर सिंह ने सिपाही राजेश कुमार व सज्जाद के साथ मिलकर थानाक्षेत्र के जबरेला गांव में छापेमारी की। यहां गांव के बाहर एक बाग के पीछे खंडहर में असलहा फैक्ट्री का संचालन हो रहा था। पुलिस को देख कर सुरेश पासी पुत्र श्यामलाल निवासी सिमरी मौके से भाग निकला। जबकि नवल पुत्र मुन्ना निवासी जबरैला को पकड़ लिया गया। मौके से बने तमंचे व कई अर्द्धनिर्मित तमंचों के अलावा उपकरण बरामद किया है। एसओ जेएन सिंह ने बताया कि पकड़े गए नवल का भतीजा अमित पुत्र ललित व चाचा बाबूराम पुत्र रामदयाल पहले से अवैध असलहा बनाने में जेल जा चुके हैं। यह लखनऊ से मोहनलालगंज के बीच असलहों की सप्लाई करते हैं।
एसपी नेहा पांडेय ने बताया कि इन असलहों का चुनाव के दौरान प्रयोग करने की योजना थी। लेकिन थाना पुलिस की सक्रियता से अवैध कारोबार भांडा फोड़ कर लिया गया। उन्होंने टीम को पुरस्कृत करने की भी बात कही।
करीब हजार तमंचों की कर चुके हैं सप्लाई
गंगाघाट थानाक्षेत्र के कटरी पीपरखेड़ा के पास पकड़ी गई असलहा फैक्ट्री में शामिल अभियुक्त अभी तक लगभग एक हजार तमंचों की सप्लाई कर चुके हैं। यह तमंचे उन्होंने कहां बेचे पुलिस इसका पता लगा रही है। इतना ही नहीं इस असलहा फैक्ट्री का संचालन कई महीनों से हो रहा था लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी। उपमहानिरीक्षक के असलहा फैक्ट्री के खुलासे के निर्देश के बाद जिले के आला अधिकारियों की निद्रा टूटी और अब उन्हें असलहा फैक्ट्रियां ही धड़ल्ले से संचालित मिल रही हैं।