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Unnao News: डामर की पर्त उखाड़ते ही फूट पड़ा भ्रष्टाचार का फव्वारा

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उन्नाव। जेसीबी से सड़क की ऊपरी पर्त हटाते ही अमृत योजना में हुए भ्रष्टाचार का फव्वारा एक बार फिर फूट पड़ा। एक घंटे में हजारों लीटर पानी बह गया। इस दौरान यातायात प्रभावित होने से जाम भी लगा। नगर पालिका के जलकल अभियंता के मुताबिक, कई दिनों से पाइप लाइन से पानी का रिसाव हो रहा था। टीम मरम्मत करने पहुंची और जैसे ही जेसीबी से ऊपरी पर्त हटाई तेज बहाव शुरू हो गया। पता चला कि लोहे की यह पाइप लाइन अमृत योजना की है। इस दौरान यातायात भी बाधित हुआ।
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शहर और शुक्लागंज नगर पालिका क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए वर्ष 2018 में कुल 264 करोड़ रुपये अमृत योजना के तहत स्वीकृत हुए थे। इस योजना में बड़े पैमाने पर घालमेल हुआ। इसी का नतीजा है कि छह साल बाद भी सिर्फ टेस्टिंग ही चल रही है। पानी का दबाव पड़ते ही भूमिगत पाइप लाइनें फट रही हैं। यही वजह है कि शहरवासियों को अब तक शुद्ध पानी नहीं मिल सका है।

शहर के गांधी नगर तिराहा के पास टाइप टू कालोनी को जाने वाले रास्ते के मोड़ पर कई दिनों से पानी का रिसाव हो रहा था। सूचना पर शुक्रवार दोपहर 12 बजे नगर पालिका के जलकल विभाग की टीम मरम्मत करने पहुंची। गड्ढा खोदने के लिए जैसे ही जेसीबी से सड़क की ऊपरी पर्त हटाई तो पानी का तेज रिसाव शुरू हो गया। कुछ ही देर में पानी का फव्वारा फूट पड़ा। एक घंटे में हजारों लीटर पानी बह गया। सूचना पर पंप हाउस से जलापूर्ति बंद कराई गई, इसके एक घंटे बाद पानी का बहाव रुका।
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पानी का तेज बहाव होने से गांधी नगर से जिला अस्पताल, कालेज रोड और गदनखेड़ा बाईपास को जाने वाले मार्ग का यातायात बाधित होने से जाम लग गया। तिराहा पर मौजूद यातायात पुलिस ने एक-एक तरफ के वाहनों को बारी-बारी निकलवाया, इसके बाद यातायात सामान्य हो सका।

ये है अमृत योजना
- योजना के दो फेज में कुल 264 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। पहले फेज में गंगा बैराज के पास नदी में इंटेकवेल, 80 एमएलडी क्षमता का डब्ल्यूटीपी (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) के अलावा 14 ओवरहेड टैंक (पानी की टंकियां) और 14 अंडर ग्राउंड टैंक (भूमिगत टैंक) बनाए गए हैं।
- दूसरे फेज में 59 करोड़ से शहर और शुक्लागंज के हर वार्ड में भूमिगत पाइप लाइन डालने और हर घर में कनेक्शन देकर पानी पहुंचाना है। लेकिन दूसरे चरण के काम में कार्यदायी संस्था लगातार सुस्ती, घटिया पाइप लाइन और पाइप लाइनों को जोड़ने में लापरवाही से टेस्टिंग फेल होती रही है। 10 बार समय सीमा बढ़ाने के बाद भी शहर के 12 जोन में से केवल सात में जलापूर्ति की टेस्टिंग पूरी होने का दावा किया जा रहा है। शुक्लागंज में भूमिगत पाइप लाइन का काम अभी लगभग आधा ही हो सका है।




तीन बार लग चुका जुर्माना
पेयजल योजना में लेटलतीफी पर जल निगम ने निर्माण कार्य करा रही एजेंसी पर अब तक तीन बार करोड़ों का जुर्माना लगा चुका है। सितंबर 2024 को 5.90 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गया। इससे पहले खोदी गई सड़कों की मरम्मत न करने झूठी रिपोर्ट देने में जून 2023 में एक करोड़ रुपये और 21 नवंबर 2023 को 5.50 करोड़ रुपये जुर्माना लग चुका है।

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बोले जिम्मेदार
तीन दिन से पानी के रिसाव की सूचना मिल रही थी। इसी स्थान पर नगर पालिका की भी पाइप लाइन है। इससे अनुमान था कि पालिका की जलापूर्ति लाइन में रिसाव हुआ है। पाइप लाइन पहले से टूटी थी। जैसे ही ऊपरी पर्त हटाई गई, पानी का तेज रिसाव शुरू हो गया।
- विवेक कुमार, अभियंता, नगर पालिका जलकल विभाग


नगर पालिका ने बिना जानकारी दिए ही पाइप लाइन की मरम्मत करने के लिए खोदाई शुरू कर दी। जेसीबी की टक्कर से लोहे की पाइप लाइन टूटी है। पाइप लाइन 400 एमएम डायस की है और तीन साल से इस पर पानी का दबाव भी डाला जा रहा था लेकिन कहीं फाल्ट नहीं हुआ. अगर नगर पालिका ने जानकारी दी होती तो सुरक्षित तरीके से इसकी मरम्मत करा दी गई होती।
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- पंकज रंजन झा, एक्सईएन जल निगम
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