फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अरबों के ठप पड़े विकास कार्य

Tue, 25 Oct 2016 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो उन्नाव
विज्ञापन
महेशखेड़ा संपर्क मार्ग पर गिट्टी डालकर बंद हुआ काम। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
डिप्लोमा इंजीनियरों की हड़ताल को लगभग एक माह पूरे होने वाले हैं। इसके बाद भी सरकार अभी तक हड़ताल पर चुप्पी साधे है। इंजीनियरों की हड़ताल का खामियाजा आम जनमानस को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि अरबों के निर्माण व विकास कार्य बंद पड़े हैं। जिन खस्ताहाल मार्गों का निर्र्माण कार्य शुरू होने वाला था। वह फिलहाल ठप होने से लोगों को हिचकोले खाते हुए सफर करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


मालूम हो कि 4800 ग्रेड पे और तीन प्रोन्नति वेतनमान के लिए 27 सितंबर से जिले के विभिन्न विभागों में काम करने वाले 148 डिप्लोमा इंजीनियर हड़ताल पर हैं। 28 दिनों से इंजीनियर कलक्ट्रेट के पास धरने पर बैठे हैं। इससे कई विभागों में विकास व निर्माण कार्य रुक गए हैं। इनमें पीडब्ल्यूडी विभाग के दोनों खंड के 90 करोड़ के चालू काम और 70 करोड़ के नए प्रोजेक्ट की शुरुआती प्रक्रिया ही रुक गई है।  

इससे करीब 97 करोड़ की लागत से बन रही उन्नाव-शुक्लागंज रोड समेत अन्य सड़कों का निर्माण समय से पूरा न होने पर भी संकट हैं। यही स्थिति जलनिगम की है। करीब 50 लाख की चालू योजनाएं बंद हैं और करीब ढाई करोड़ की लागत के नए प्रोजेक्ट के स्टीमेट नहीं बन पा रहे। हड़ताल का आरईएस, राज्य सेतु निगम, राजकीय निर्माण निगम, यूडीए, समाज कल्याण विभाग की योजनाओं पर पड़ रहा है। कई खस्ताहाल मार्ग अधूरे पड़े हैं। पीएमजीएसवाई से स्वीकृत कई मार्गों पर ठेकेदारों ने शुरुआती दौर में गिट्टी तो डाल दी थी लेकिन बाद में इंजीनियरों के हड़ताल पर चले जाने से काम ठप हो गया है। अब गिट्टी राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं।
विज्ञापन


कई योजनाओं पर ग्रहण
-आरईएस के अधिशासी अभियंता एसएचए रिजवी ने बताया कि डिप्लोमा इंजीनियरों की हड़ताल से 75 लाख की लागत से बन रहे 17 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण, 32 लोहिया गांवों में 7 करोड़ की लागत से बन रही सीसी सड़कें और ढाई करोड़ की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की नई सड़कें और 20 लाख के मरम्मत कार्य ठप हैं।


-पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन एपी सिंह ने बताया कि हड़ताल से करोड़ों के काम ठप हैं। उन्होंने बताया कि हड़ताल लंबी खिंचती जा रही है। ऐसे में परेशानी बढ़ गई हैं।
-जलनिगम के एक्सईएन मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि 35 लाख की चालू परियोजनाओं का काम प्रभावित है। जो योजनाएं पूरी हो चुकी हैं उनका भुगतान लटक गया है। वहीं हैंडपंपों और ओवरहेड टैंकों के निर्माण के स्टीमेट न बनने से कार्य स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें