सरीला (हमीरपुर)। जिटकरी गांव में शनिवार सुबह करीब साढ़े सात बजे डंपर से कुचलकर किसान की मौत के 33 घंटे बाद भी न तो आरोपी वाहन का पता चल सका और न ही प्राथमिकी दर्ज हुई। इससे नाराज ग्रामीणों ने रविवार को जिटकरी-बौखर मार्ग पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। सुबह करीब सात बजे शुरू हुआ जाम शाम साढ़े चार बजे प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ। इस दौरान सड़क पर सैकड़ों ओवरलोड डंपर खड़े रहे।
जिटकरी गांव में शनिवार सुबह पैदल खेतों की ओर जा रहे किसान फूल सिंह को बेकाबू डंपर ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद डंपर चालक मौके से भाग गया था जबकि घायल किसान करीब डेढ़ घंटे तक खनन-मार्ग में तड़पता रहा। परिजन एक किराये के साधन से घायल किसान को अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। प्रशासन की कोई कार्रवाई न होने पर रविवार को ग्रामीण उग्र हो गए।
ग्रामीण शैलेंद्र प्रताप, उदयराज आदि ने बताया कि हादसा करने वाले डंपर और चालक पर कार्रवाई, परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए। जर्जर सड़क की मरम्मत कराई जाए। आरोप है कि प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज कराने की बात तो कही लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। माैके पर पहुंचे जरिया थाना प्रभारी दिनेश पांडेय, क्षेत्राधिकारी साहरुख खान और तहसीलदार रविंद्र पाल ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया।
मुआवजे के भरोसे टला न्याय, फिर दौड़ने लगे डंपर
जिटकरी के ग्रामीणों की आंखों में गुस्से के साथ बेबसी भी साफ झलक रही है। शैलेंद्र, उदयराज राजपूत, प्रताप राजपूत, हरिसिंह राजपूत, बहादुर, धूराम वर्मा, छुन्ना, प्रकाश, निशांत, अर्जुन, मोतीलाल, जगपाल, सुगर माथव और पुट्टी राजपूत का आरोप है कि न्याय की मांग लेकर थाने पहुंचे थे लेकिन उन्हें आश्वासन और प्रक्रिया में उलझा दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें सोमवार को आने व दोनों पक्षों से प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही। ग्रामीणों का कहना है अगर हादसे के बाद भी सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहा तो फिर किसी और घर का चिराग बुझने में देर नहीं लगेगी।
मौत का रास्ता बना खनन मार्ग
ग्रामीणों का कहना है कि जिटकरी बौखर मार्ग पर रोजाना तेज रफ्तार से डंपर दौड़ते हैं। कच्ची और जर्जर सड़क, उड़ती धूल और पानी के छिड़काव के अभाव में हालात और खतरनाक हो जाते हैं। यहा कई बार हादसे हो चुके हैं लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी भी दे चुके हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली और खनन वाहनों के आतंक को लेकर वे पहले भी कई बार विरोध कर चुके हैं। चुनाव के दौरान भी बहिष्कार की चेतावनी दी गई थी, हालांकि अंतिम समय में मतदान किया गया लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।
करीब 40-50 ग्रामीणों ने मिलकर जाम लगाया था। इससे कुछ वाहन खड़े हो गए थे। ग्रामीण कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं जिन्हें समझा-बुझाकर जाम खुलवाया गया। ओवरलोडिंग के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। -रविंद्र पाल, तहसीलदार सरीला
ग्रामीणों को थाने में लिखित शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कहा गया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - शहरुख खान, क्षेत्राधिकारी सरीला
फोटो19एचएएमपी 26- जाम के दौरान खड़े ओवरलोड डंपरों की कतार। संवाद