उन्नाव। प्रधानमंत्री शुक्रवार को नई दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से किसानों के खातों में सम्मान निधि की किस्त ट्रांसफर करेंगे। इस दौरान प्रगतिशील किसानों से बात भी करेंगे। प्रधानमंत्री से बात करने के लिए देश से छह किसानों को चुना गया है। इसमें प्रदेश से उन्नाव निवासी अरविंद को भी शामिल किया गया है।
सिकंदरपुर सरोसी के गांव रौतापुर निवासी 25 वर्षीय अरविंद गणित से बीएससी किए हैं। बीटीसी व टीईटी भी पास हैं। अरविंद ने बाहर नौकरी करने की अपेक्षा खेती में हाथ आजमाया। अरविंद के पास तीन एकड़ खेतिहर भूमि है। उनके मुताबिक डेढ़ साल पहले सरकार ने नमामि गंगे योजना के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा देने की शुरुआत की तो वह काफी प्रभावित हुए। इसके बाद जैविक खेती की जानकारी करके काम शुरू किया। पिछले डेढ़ साल में अरविंद ने जैविक विधि से खेती करके काला नमक प्रजाति का चावल, गेहूं, तिल, मूंगफली, खरबूजा, तरबूज, पपीता की फसल तैयार की। नमामि गंगे जैविक कृषक नाम से समूह गठित करके किसानों को जोड़ा। उप कृषि निदेशक डॉ. नंदकिशोर का दावा है कि वर्तमान समय में 250 किसान जुड़े हुए हैं। सभी जैविक विधि से खेती कर रहे हैं। भारत सरकार की ओर से संचालित इंडिया ग्रीन पोर्टल द्वारा अरविंद को जैविक खेती का प्रमाणपत्र भी मिल चुका है।
उप कृषि निदेशक के मुताबिक जैविक खेती देशी गाय के गोबर एवं गो-मूत्र पर आधारित है। दो सौ लीटर प्लास्टिक के ड्रम में 180 लीटर पानी भरकर उसमें 10 किलो गोबर, दस किलो गोमूत्र, दो किलो बेसन, दो किलो गुड़, आधा किलो बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी मिलाकर दो दिन तक लकड़ी से चलाते हैं। इसको देशी खाद (जीवामृत) कहते हैं। गर्मियों में यह दो दिन में और सर्दियों में तीन दिन में तैयार हो जाता है। किसान खेत में पलेवा या सिंचाई के समय पानी के साथ प्रयोग करते हैं। इसके प्रयोग के बाद रासायनिक उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती है। जैविक खेती से उत्पादित अनाज भी मिलावट रहित और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
जैविक खेती के प्रति रुझान को देखकर ही अरविंद का प्रधानमंत्री से बातचीत के लिए चयन किया गया है। प्रदेशभर में केवल उन्नाव के ही किसान को चयनित किया जानाजिले के लिए गर्व की बात है।
-रवींद्र कुमार, डीएम