कोल्ड डायरिया से पीड़ित दुधमुंहे बच्चे की मौत के बाद शहर के एक नर्सिंगहोम में जमकर बवाल हुआ। बच्चे की मौत से गुस्साए परिजनों व ग्रामीणों ने नर्सिंगहोम में तोड़फोड़ की और शव रखकर सड़क पर बैठ गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने बल प्रयोग का प्रयास किया तो भीड़ आक्रोशित हो गई। जैसे-तैसे मामला शांत हुआ।
मगर इसी बीच पहुंचे सीओ सिटी ने शव को पोस्टमार्टम भेजने और दोनों ओर से रिपोर्ट दर्ज करने की बात कही तो एक बार फिर बवाल हो गया। मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। कोतवाली एसएसआई एसएन पांडेय ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
बीघापुर थाना क्षेत्र के भिम्मा गोड़वा गांव निवासी विनोद के पांच माह के बेटे शौर्य को मंगलवार देर शाम कोल्ड डायरिया हो गया था। पिता विनोद ने बच्चे इलाज कराया, मगर लाभ न होने पर रात दो बजे बेटे को मोहल्ला सिविल लाइंस स्थित नर्सिंगहोम उन्नाव मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया।
विनोद के मुताबिक नर्सिंगहोम में मौजूद डॉ. मोहन निगम ने 20 हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को भर्ती किया और डॉ. इकबाल ने इलाज किया।
विनोद के मुताबिक हालत में सुधार न होने पर उन्होंने कई बार डॉक्टर से बात की और बच्चे को रेफर कराने की बात कही, लेकिन डॉक्टरों ने रेफर नहीं किया। बुधवार दोपहर 3.30 बजे बच्चे की मौत हो गई, इसके बाद भी डॉक्टरों ने नहीं बताया और बच्चे को ले जाने की बात कहने लगे। बच्चे की मौत की मौत की जानकारी होते ही मां रोली, दादी सावित्री व अन्य परिजन रोने-बिलखने लगे।
डॉक्टरों ने बाहर निकलकर बैठने की बात कही तो लोग भड़क गए और नर्सिंगहोम में तोड़फोड़ शुरू कर दी। प्रदर्शन कर रहे महिला-पुरुष शव लेकर सड़क पर बैठ गए और जाम लगा दिया।
कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और पहले बल प्रयोग का प्रयास किया। बाद में सीओ राकेश कुमार सिंह ने एफआईआर दर्ज कराने और शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कहकर लोगों को शांत कराया। कोतवाली एसएसआई एसएन पांडेय ने बताया कि नर्सिंगहोम के डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है।
इलाज में नहीं हुई लापरवाही- उन्नाव। नर्सिंगहोम संचालक डॉ. निर्मल खेड़िया ने बताया कि बच्चे के इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई। जब बच्चे को लाया गया था तो उसकी हालत काफी खराब थी।
बताया कि कोई भी डॉक्टर अपने मरीज की मौत नहीं होने देना चाहता। उन्होंने बताया कि बच्चे के परिजनों को कई बार कहा गया कि वह बच्चे को कानपुर लेकर जाएं, लेकिन महिलाएं परिवार के पुरुषों के आने का इंतजार करती रहीं। कहा कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह गलत हैं।