मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पांच फरवरी को दोस्ती का फर्ज निभाने उन्नाव आ रहे हैं। वह अपने दोस्त और पार्टी के जिला महासचिव राजेश यादव के भाई के तिलकोत्सव में शरीक होंगे। इसकी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। मुख्यमंत्री की आगवानी को लेकर राजेश का पूरा परिवार उत्साहित है।
राजेश का कहना है कि मुख्यमंत्री ने उनका निमंत्रण स्वीकार कर न सिर्फ दोस्ती का फर्ज निभाया है बल्कि 16 साल से पार्टी में हर मोर्चे पर किए गए संघर्ष का ईनाम भी दिया है।
उन्नाव शहर के सिविल लाइन से सटे मोहल्ला किशोरी खेड़ा निवासी राजेश यादव की अखिलेश यादव से पहली मुलाकात 1995 में हुई। तब अखिलेश यादव पूरे प्रदेश में युवाओं को लामबंद करने में लगे थे। अखिलेश यादव ने यात्राएं निकालीं तो राजेश उनके साथ-साथ पूरे प्रदेश में घुमे।
वर्ष 2000 में समाजवादी पार्टी की क्रातिरथ यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने पर युवजन सभा के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। राजेश ने युवाओं को एकत्र किया और पार्टी से जोड़ा। वर्ष 2002 से 2005 तक वह जिला सचिव रहे। और 2009 में जिला महासचिव बने। इसके बाद 2011 में प्रदेशभर में निकाली गई साइकिल यात्री में अखिलेश यादव के साथ रहे।
इस दौरान अखिलेश यादव उन्नाव आए तो राजेश यादव के घर पर रुके। अगले दिन जब साइकिल यात्रा लखनऊ के लिए चली तो तमाम कार्यकर्ताओं के साथ राजेश यादव भी उनके साथ मोहनलालगंज तक गए। लगातार साथ रहने का नतीजा रहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अखिलेश यादव ने राजेश को पूरी तरह से तवज्जो दिया।
राजेश यादव के भाई की शादी तय हुई और तिलक का कार्यक्रम पांच फरवरी को तय हुआ। राजेश ने मुख्यमंत्री को तिलक का न्यौता दिया तो उन्होंने तुरंत घर आने की हामी भर दी। मुख्यमंत्री के हामी भरते ही पूरा परिवार गदगद है। राजेश कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने घर आने की हामी भरकर उनकी वर्षों की मेहनत का इनाम दिया है।
मुख्यमंत्री ने हमेशा एक दोस्त की तरफ व्यवहार किया, यह उनका बड़प्पन है। अपनी ख्वाहिश के बारे में पूछने पर राजेश कहते हैं कि बस इतनी सी ख्वाहिश है कि यह दोस्ती ताउम्र निभती रहे। राजेश के परिवार के दूसरे सदस्य भी मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर खुश हैं।