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विवादों में फंसी 250 बीघा भूमि के सर्वे पर गंभीर हुआ प्रशासन

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उन्नाव। सदर तहसील क्षेत्र में पिछले 27 साल से सीमा गैप की आड़ में भूमाफियाओं के चंगुल में फंसी 250 बीघा भूमि की वास्तविक स्थिति और खातेदारों के नक्शे तैयार करने के लिए प्रशासन ने सर्वे विभाग को सक्रिय किया है। जिले के अधिकारियों पर भूमाफियाओं से साठगांठ के आरोप लगा राजस्व परिषद से की गई शिकायतों के बाद सर्वे विभाग में एक कानूनगो की तैनाती की गई है। जल्द ही चार लेखपालों को संबद्ध कर भूमि की पैमाइश कर कब्जेदारों को बेदखल किया जाएगा।
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उन्नाव और कानपुर नगर जिले की सीमा के बीच सदर तहसील की ग्रामसभा मझरा पीपर खेड़ा एहतमाली और कटरी पीपर खेड़ा में भूमि कटान होने से भूमि नंबरों में उलटफेर हो गया था। वर्ष 1992 में जिला प्रशासन ने सर्वे विभाग को सर्वे कर भूमि निर्धारण और नक्शा दुरुस्ती का आदेश दिया था। हालांकि लंबा वक्त बीतने के बाद भी सर्वे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। सर्वे विभाग 60 फीसदी से अधिक भूमि के मूल अभिलेख उपलब्ध न होने की बात कह टालता रहा। इस दौरान करीब 250 बीघा जमीन पर भूमाफियाओं ने राजस्व अधिकारियों से साठगांठ कर मनमाने तरीके से कब्जे और बिक्री की। खास बात यह है कि भूमि का प्रमाणित नक्शा न होने के बाद भी जमीनों की बिक्री और रजिस्ट्री पर प्रतिबंध नहीं लगा। कानपुर की सीमा से सटी इस भूमि पर सैकड़ों बीघा जमीन बेचकर उसकी प्लाटिंग और निर्माण कराए गए।
एडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि पुरवा तहसील में तैनात कानूनगो रामनरेश को सर्वे विभाग में संबद्ध किया गया है। चार लेखपालों को भी संबद्ध किया जा रहा है और जल्द से जल्द सर्वे पूरा कर भूमि का खातेदार काश्तकारों ब्योरा व भूमि नंबर सहित प्रमाणित नक्शा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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