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डीपीआरओ पर लटकी कार्रवाई की तलवार

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उन्नाव। जिला पंचायतराज अधिकारी (डीपीआरओ) पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। कोरोनाकाल में पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर से संबंधित जानकारी एसआईटी को भेजने में जिला प्रशासन ने डीपीआरओ को लापरवाह माना है। विधानसभा में इससे संबंधित उठे सवाल के जवाब में जिम्मेदार अधिकारी पर अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है।
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विधानसभा सदस्य रामअचल राजभर ने 24 सितंबर 2020 को विधानसभा में कोरोना किट खरीदारी को लेकर प्रश्न उठाया था। जवाब मांगा था कि क्या इस मामले में डीपीआरओ के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है, अगर नहीं हुई तो क्यों। 18 फरवरी को सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने इस सवाल के जवाब में बताया है कि एसआईटी को खरीद से संबंधित गूगल सीट में 20 बिंदुओं पर फीड सूचनाओं के प्रिंट आउट पर सीडीओ व डीपीआरओ के हस्ताक्षर व मोहर से प्रमाणित कराकर 24 सितंबर को ईमेल पर उपलब्ध कराने के अपर मुख्य सचिव के निर्देश मिले थे। डीएम ने 24 सितंबर को रात 11 बजे उनसे (सीडीओ) से फोन पर सूचना के बारे में पूछा था। जानकारी करने पर पता चला कि डीपीआरओ पत्नी के इलाज के सिलसिले में जिला मुख्यालय से बाहर हैं। उन्होंने लिखित व मौखिक स्वीकृति नहीं ली। इसलिए सूचना समय से शासन को नहीं भेजी जा सकी थी। इस अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए डीएम रवींद्र कुमार ने डीपीआरओ के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए पत्र शासन को भेज दिया है।
कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 23 जून को ग्राम पंचायतों में पल्स आक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर (थर्मल स्कैनर) की खरीदारी करने के आदेश जारी हुए थे। इस कोविड किट की खरीदारी ग्राम पंचायतों को खुद करनी थी और आशा कार्यकर्ताओं को दिया जाना था। आदेश के बाद 1043 ग्राम पंचायतों में इनकी खरीद शुरू हुई। कई ग्राम पंचायतों में केंद्रीयकृत खरीदारी करके किट के लिए पांच हजार से अधिक का भुगतान किया गया। यह शासन से निर्धारित रेट से दो से तीन गुना अधिक रही। बाद में सुल्तानपुर व गाजीपुर में मामला पकड़ा गया था तो शासन ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। जिले में भी प्रारंभिक जांच शुरू हुई थी। इसमें कुछ ग्राम पंचायतों में किट की खरीदारी में गड़बड़ी मिली थी। बाद में प्रदेश सरकार ने एसआईटी जांच के आदेश दिए थे।
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