सफीपुर। तहसील के रिकार्ड में दर्ज 28 बीघा सरकारी जमीन पर गांव के ही एक किसान ने उसमें धान की फसल बो दी। ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीएम ने जांच कराई तो मामला सही पाया। तहसील प्रशासन ने जमीन को कब्जे में लिया है। वहीं आरोपी का कहना है कि चकबंदी में गलती से यह जमीन अभिलेखों में बंजर दर्ज हो गई। पीड़ित ने कमिश्नर से शिकायत की।
गांव सकहन राजपूतान निवासी गुरु प्रसाद के पुत्र सुधीर कुुमार ने भूमि संख्या 3 व 4 की 28 बीघा जमीन पर धान की फसल बो रखी है। ग्रामीणों ने सरकारी जमीन पर धान की फसल बोने की शिकायत एसडीएम से की थी। सरकारी जमीन पर कब्जे की जानकारी राजस्व टीम को मौके पर भेजकर जांच कराई गई तो वह तहसील के रिकॉर्ड में बंजर में दर्ज मिली।
लेखपाल की रिपोर्ट पर इस जमीन पर बोई फसल को तहसील प्रशासन ने कब्जे में लिया है। आरोपी सुधीर कुमार का कहना है यह जमीन उसके बाबा मेहीलाल के नाम थी। उनकी मौत के बाद पिता रामदीन व चाचा सोमदार के नाम जमीन चढ़ गई। साल 1974 में चकबंदी के दौरान भूमि संख्या 1356-1359-1360-1362 को बदलकर बंजर भूमि 3 व 4 दर्ज की गई। तब से यह मामला लंबित रहा।
साल 2012 में कब्जा करने का आरोप लगा। मुकदमा तहसीलदार न्यायालय में दर्ज हुआ। जिसमें जमीन के साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। 31 दिसंबर 2013 को तहसीलदार ने जांच के बाद सुधीर कुमार के पक्ष में फैसला सुनाकर नोटिस निरस्त कर कब्जे के आरोप से भी बरी कर दिया। साल 2016 में एसडीएम न्यायालय में बंजर भूमि 3-4 को परिवर्तित कर भूमि मालिकों के नाम दर्ज करने का वाद दायर हुआ जो न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय के निर्णय से पहले की गई कार्रवाई गलत है। शिकायत अपर आयुक्त चकबंदी से की गई है। वहीं एसडीएम राजेंद्र कुमार ने बताया कि बंजर भूमि कब्जे की शिकायत थी। जांच में मामला सही मिलने पर यह कार्रवाई की गई है।