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मिसाल बनी अब्बास बाग की जनता

Wed, 24 Dec 2014 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव। अब्बास बाग के लोगों की हिम्मत व लगन देखकर चार पंक्तियां याद आती हैं। कौन कहता आसमां में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। इन लाइनों का वास्तविक अर्थ अब्बास बाग के लोग ही शायद सिद्ध कर रहे हैं। यह कहना कुछ गलत नहीं होगा।
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 कुछ माह पूर्व तक जिस पार्क में सुबह-सुबह गंदे जानवर, अराजकतत्वों के अड्डे व कूड़े के ढेेर देखने को मिलते थे, वहां अब लोग मॉर्निंग वॉक करने आ रहे हैं। बच्चे खेलते हैं झूला झूलते हैं।

हर तरफ तरह-तरह के न सिर्फ रंग बिरंगे फूल खिले दिखते हैं बल्कि उनकी सुगंध भी मन-मस्तिष्क को तरोताजा कर रही है। ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि यहां के लोगों ने अपने घरों व इसके आस-पास के क्षेत्र को साफ-सुथरा, सुंदर व स्वस्थ वातावरण का बनाने की ठान ली है।
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मोहल्ले के लोगों ने एक कमेटी बनाकर यहां के कूड़ाघर में तब्दील हो चुके पार्क को दोबारा उसका अस्तित्व देने की पहल की और मात्र 20 दिनों के भीतर ही 20 साल की गंदगी को दूर कर दिया। इस काम में उनका पैसा भी खर्च हुआ जो उन्होंने खुद की कमेटी के सदस्यों से जुटाया।

शहर के मोहल्ला अब्बास बाग के जिस पार्क के भीतर बीते एक माह पूर्व लोग जाने से भी कतराते थे और यहां पर गंदे जानवर घूमते रहते थे। इसके अलावा अराजकतत्व सुबह से इस पार्क में पहुंच जाते थे और आस-पास के लोगों का जीना मुहाल था। वहां की रौनक आज देखते ही बनती है।

पूरे पार्क की साफ-सफाई करवा दी गई है। पार्क में कूड़े के ढेर के बजाए विभिन्न प्रकार के सुगंधित फूलों के पेड़ लगे हैं। चारों ओर नई रंगाई-पुताई हो गई है और लोग पार्क के अलावा अपने घरों की बालकनी में बैठकर इस खूबसूरत नजारे का आनंद लेते हैं।

यह सब स्थानीय निवासी डॉ. सुनील कुमार अवस्थी की पहल से संभव हो सका है। उन्होंने इस पार्क को उसका पुराना रूप देने की ठान ली और इसकी सफाई करवाने के लिए नगर पालिका प्रशासन से गुहार लगाई। पालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते जब उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो उन्होंने इसकी सफाई स्वयं ही शुरू करवाई।

फिर क्या था उनके साथ पहले एक फिर दो और फिर पूरे मोहल्ले के लोगों ने कंधे से कंधा मिला लिया। देखते ही देखते 20 साल से फैली पार्क की गंदगी मात्र 20 दिनों में दूर हो गई और पार्क को उसका अस्तित्व मिल गया। इसके मोहल्ले के लगभग दर्जन भर लोगों ने तन-मन-धन से उनका सहयोग किया और आज सभी उनके इस काम की सराहना करते नहीं थकते हैं।
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