उन्नाव। बारिश के बाद भी बिजली कटौती से निजात नहीं मिल सकी है। रोस्टिंग के अलावा लोकल फाल्टों के नाम पर घंटों कटौती की जा रही है। बिजली की मांग में मामूली गिरावट दर्ज की गई है लेकिन मुख्यालय से मांग के सापेक्ष बिजली नहीं मिल पा रही है
बारिश शुरू होने पर लोगों के साथ विद्युत विभाग के अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि मांग घटेगी और भरपूर बिजली मिलेगी। यह उम्मीद बेमानी साबित हुई। बारिश से मांग में कुछ कमी आई है लेकिन इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। रोस्टिंग पूर्व की ही भांति चल रही है। इसके अलावा बारिश से होने वाले लोकल फाल्टों से भी घंटों बिजली गुल हो जाती है। कुछ समय पहले तक बिजली की मांग जिले में करीब 80 मिलियन यूनिट थी जो इस समय घटकर 70 मिलियन यूनिट पर पहुंच गई है। भले ही मांग में कमी आई हो लेकिन मुख्यालय से मात्र 50 मिलियन यूनिट की ही आपूर्ति की जा रही है। 30 मिलियन यूनिट की कमी को बराबर करने के लिए कटौती की जा रही है। वर्तमान में भी मुख्यालय से भोर पहर 4 से 6, दोपहर 2 से 3 और शाम को 7 से 11 बजे तक कुल 7 घंटे की रोस्टिंग की जा रही है। इसके अलावा मांग बढ़ने पर और पर्याप्त बिजली न मिलने से इसे बराबर करने के लिए लोकल स्तर पर भी कटौती शरू हो जाती है। पानी बरसने के बाद भी उमस में कमी नहीं आई है। अधाधुंध कटौती से लेाग बेहाल हो रहे हैं।
पानी की किल्लत भी पड़ रही झेलनी
उन्नाव। बिजली के साथ-साथ लोगों को पानी की भी किल्लत झेलनी पड़ रही है। शहर के आवास विकास, आदर्श नगर, इन्द्रानगर, गांधीनगर, पीडी नगर, कब्बाखेड़ा, किला, तालिबसराय सहित अन्य मोहेंल्लों में बिजली न आने पर पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। लोगों की कतारें हैंडपंपों पर दिखती हैं। पहले पानी भरने को लेकर लोगों में मुहांचाही भी होती रहती है। भोर पहर 4 से 6 बजे की रोस्टिंग से पानी भी गायब हो जाता है। कहीं लोकल फाल्ट हो गया तो घंटों बिजली गुल हो जाती है। दिक्कतें बढ़ जाती हैं। लोगों की मोटरें जवाब दे जाती हैं। इस कारण पानी नहीं भर पाता है। लोग सुबह जल्दी उठकर मोहल्लों के हैंडपंपों पर जाकर लाइन लगाने को मजबूर हो जाते हैं। घंटों लाइन लगाने के बाद नंबर आता है। खजुरियाबाग, दरोगाबाग, सिविल लाइन आदि क्षेत्रों में लोकल फाल्ट होने से रात भर बिजली नहीं आई। मोटरें न चलने से क्षेत्र में जबरदस्त पानी की किल्लत हो गई।
फाल्ट पर गांवों में कई दिन गुल रहती है
उन्नाव। मांग और आपूर्ति के अंतर को समान रखने के लिए की जा रही कटौती का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। नियमानुसार गांवों को 14 घंटे बिजली मिलनी चाहिए लेकिन मांग के सापेक्ष आपूर्ति न मिलने से मात्र 10 घंटे पहले ही बिजली दी जा रही थी। अब वर्तमान समय में बमुश्किल 4 से 6 घंटे की आपूर्ति की जा रही है। कई गांव तो ऐसे हैं जहां यदि छोटा भी फाल्ट हुआ तो लंबे समय के लिए बिजली गुल हो जाती है। यह हालत तब है जब गांवों को सप्ताहवार आपूर्ति दी जाती है। एक सप्ताह दिन व एक हफ्ते रात में आपूर्ति दी जानी चाहिए। लेकिन इधर नियमों को दरकिनार कर मात्र कुछ ही घंटे बिजली दी जा रही है। कई गांवों में तो बिजली की लुकाछुपी ही हुआ करती है।
ब्रेक डाउन से फैक्ट्रियों की आपूर्ति ठप
उन्नाव। भारी बारिश से ब्रेक डाउन हो जाने से दही चौकी स्थित कई फैक्ट्रियों बंद हो गई है। इन फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह से ठप हो चुका है। सूचना मिलने पर विद्युत विभाग के अधिकारियों ने कर्मचारियों को ब्रेक डाउन की मरम्मत के लिए भेजा लेकिन घंटों की मशक्कत के बाद भी फाल्ट दुरुस्त नहीं हुआ। जिस कारण फैक्ट्रियां पूरी तरह से बंदी की कगार पर हैं।