उन्नाव। गेहूं खरीद एजेंसियों के पास पैसा खत्म हो जाने से किसानों का करीब 50 लाख रुपए फंस गया है। पैसा न होने से खरीद एजेंसियां किसानों को भुगतान नहीं कर पा रही हैं। भुगतान फंसने की आशंका में गेहूं किसान सरकारी खरीद केंद्र की तरफ रुख नहीं कर रहे है। इससे गेहूं खरीद के प्रभावित होने की आशंका भी जताई जाने लगी है। हालांकि एजेंसी संचालक किसानों को भुगतान देने का अश्वासन दे रहे है।
जनपद में 7 एजेंसिया सरकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है। इनमें खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपी स्टेट एग्रो, एसएफसी, उप्र कर्मचारी कल्याण निगम, यूपीएसएस व नैफेड शामिल हैं। विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से अब तक 10912.95 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदा जा चुका है। खरीदे गए गेहूं का 1896 किसानों को 1402.31 लाख रुपए का भुगतान हो चुका है। इनमें से एसएफसी ने 2254.85 एमटी की खरीद करके 77.32 लाख रुपए का किसानों को भुगतान कर दिया। इसमें से 1464 एमटी को गोदाम में जमा करा दिया जबकि शेष 790.85 एमटी केन्द्र पर ही रखा गया। सत्तर लाख रुपए का भुगतान होने के बाद एजेंसी के पास पैसे खत्म हो गए, जबकि खरीदा गया गेहूं केन्द्र पर ही रखा हुआ है। पैसा समाप्त हो जाने से एजेंसी की ओर से किसानों का लगभग 50 लाख रुपए का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसको देखते हुए केन्द्र प्रभारियों ने अब गेहूं खरीद बंद कर दी है। क्योंकि पूर्व में खरीदे गए गेहूं का भुगतान नहीं हो पाया है। इसके अलावा नैफेड के पास भी करीब 20 लाख रुपए की कमी हो गई है। जिससे इनसे जुड़े क्रय केन्द्रों पर गेहूं खरीद सुस्त रफ्तार से चल रही है। दो दिन पहले पीसीएफ के पास भी 80 लाख रुपए की कमी हो गई थी। बाद में एजेंसी ने पत्र भेजकर पैसे मंगवा लिए थे जिससे खरीद ज्यादा समय के लिए प्रभावित नहीं हुई थी। जिला खाद्य विपणन अधिकारी एसके द्विवेदी ने बताया कि एजेंसियों के पास पैसों की कोई कमी नहीं है। जिनके पास पैसा खत्म हो गया था उन्होंने मुख्यालय से पैसे की मांग की है। एजेंसी प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पहले से ही पैसे की व्यवस्था रखें। किसानों का भुगतान रुकना नहीं चाहिए।