उन्नाव। एक ओर जिलाधिकारी शहर के मुख्य बाजारों व सड़कों को अतिक्रमणमुक्त कराने को लेकर गंभीर
दिखाई देती हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के तालाबों पर धड़ल्ले हो रहे अतिक्रमण पर उनकी नजर नहीं पड़ रही है। यह स्थिति तब है जब क्षेत्रीय नागरिक कई बार शिकायतीपत्र देकर थक चुके हैं। लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न होने से बेखौफ भूमाफिया तालाब पाटकर धड़ल्ले से अवैध निर्माण करा रहे हैं।
उन्नाव कभी तालाबों का शहर कहा जाता थे। सौ से अधिक तालाबों पर शहर की जलनिकास व्यवस्था टिकी थी। जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गई वैसे-वैसे तालाबों को पाटने का सिलसिला शुरु हो गया। मौजूदा समय में एकाध को छोड़कर शहर के सभी तालाब लगभग पाटे जा चुके हैं। इन तालाबों पर ऊंचे-ऊंचे भवन खड़े हो गए हैं। वर्तमान समय में शाहगंज पन्नालाल पार्क स्थित अताउल्ला गंदा नाला से संपर्कित तालाब पर अतिक्रमण किया जा रहा है। कुछ दबंग तालाब को पाटकर प्लाटिंग करा रहे हैं। वहीं तालाब में अवैध रुप से निर्माण कार्य भी चल रहा है। इसको लेकर क्षेत्रीय लोगों ने कई बार डीएम को शिकायतीपत्र दिया लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को सदर विधायक पंकज गुप्ता के साथ मनोज यादव, सुनित तिवारी, आनंद शंकर त्रिपाठी, अजीत मिश्रा, संजय सिंह, अनुज निगम, विनोद सिंह आदि ने डीएम से मिल कर उन्हे मामले की जानकारी दी। बताया सैकड़ों वर्ष पुराने तालाब को तेजी से पाटा जा रहा है। शिकायतीपत्र देने के बाद भी प्रशासन द्वारा कार्रवाई न किए जाने से अतिक्रमणकारी और तेजी से तालाब को पाट रहे हैं। क्षेत्रीय नागरिकों ने डीएम को बताया कि यूडीए के मास्टर प्लान में गलती के कारण भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं। यूडीए ने मास्टर प्लान में तालाबों एवं जलाशयों को आबादी इंगित कर दिया था। यह गल्ती भूमाफियां के लिए वरदान साबित हुआ। इसको आधार बनाकर भूमाफिया संबंधित कार्यालयों के कर्मचारियों से मिलीभगत करके जमीन की प्लाटिंग करने के साथ तालाब पाट रहे हैं। जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने समस्या को लेकर पहुंचे क्षेत्रीय लोगों को आश्वस्त करते हुए कहउन्होंने पहले ही यूडीए अधिकारियों को आदेश दे रखा है कि वह तालाब की जमीन पर बनने वाले भवनों के नक्शों को पास न करें। उन्होंने कहा तालाबों पर कब्जा करके किए गए निर्माण को चिह्नित किया गया है। डीएम ने इस मामले में जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया। शहर के तालाबों पर बने अवैध भवनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए करीब छह महीने पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने योजना तैयार की थी। उन्होंने तालाबों पर हुए अवैध कब्जों क चिह्नित करने के लिए सर्वे भी कराया था। सर्वे पूरा होने के बाद अवैध निर्माण गिराया जाना था। लेकिन कार्रवाई शुरू होती इससे पहले ही उनका तबादला हो गया। उनके हटने के बाद अभियान ही ठंडा पड़ गया।