पुरवा। मां वैष्णो देवी के दर्शन करने निकले नगर के 23 श्रद्धालुओं को माता के दर्शन किए बगैर ही वापस लौटना पड़ा। श्रद्धालुओं ने बताया कि तवी नदी का रौद्र रूप देखकर सेना ने उन लोगों को पहले ही रोक लिया। उन लोगों के साथ ही देश के विभिन्न कोनों से माता के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण न तो होटल में जगह मिली और न ही रेलवे स्टेशन में। प्लेटफार्म की सीढ़ियां तक खाली नहीं थी।
कस्बे के कस्टोलवा निवासी पूर्व सभासद विमल बाजपेई अपनी पत्नी उषा बाजपेई व पुत्रों में मनीष, मृदुल, अभय, पल्लवी तथा पश्चिमटोला के प्रेम श्रीवास्तव, पत्नी रमा, पुत्र अंकुर, अंकित, अर्पित तथा रुचि, नूपुर, मीना के अलावा पुंडीक पांडेय, साकेत गुप्ता, सुधारू गुप्ता, शीतलगंज, भानू शुक्ला, दलीगढ़ी, डेला आशीष मिश्रा, कंचन, पुष्पा, रुद्र आदि श्रद्धालु 4 सितंबर को 12:45 की रात मुरी एक्सप्रेस से रवाना हुए। पांच सितंबर की शाम सात बजे यह लोग जम्मू स्टेशन के प्लेटफार्म पर उतरे। प्रेम श्रीवास्तव की मानें तो हजारों की भीड़ जमा थी। प्लेटफार्म को बदलने वाली सीढ़ियों पर भी जगह नहीं थी। आसपास कोई होटल खाली नहीं था, जबकि मुंह मांगे पैसे भी दिए जा रहे थे। सात किमी दूर रघुनाम मंदिर के पास जीवन चौक पर राजधानी होटल में बड़ी मुश्किल में कमरा मिल सका। 6 सितंबर को पठानकोट जा रहे थे लेकिन रेलवे स्टेशन को जाने वाले मार्ग को भी बंद कर दिया गया था। तवी नदी पुल के बराबर बह रही थी। लहरें 15-20 फुट ऊपर पुल पर टक्कर मार रही थीं। दृश्य बड़ा भयानक था। 7 सितंबर को रेलिंग और नदी के किनारे बड़ा मकान ढह गया था। सेना लगी थी। किसी को पुल पर नहीं जाने दे रही थी। 8 सितंबर को जब बरसात रुकी तो उन लोगों ने आगे बढ़ने के लिए सेना के एक अधिकारी से बातचीत की लेकिन उसने आगे जाने से रोक दिया। इस हृदय विदारक मंजर देखकर हृदय कांप उठा और वह लोग परिवार को लेकरअपने घर को निकल पड़े। 5 सितंबर को ट्रेन का आवागमन बंद हो गया था। किसी तरह उन लोगों ने वहीं रहकर समय काटा, क्योंकि आने जाने का कोई रास्ता नहीं था। 10 सितंबर को सारे लोग अपने घर बिना दर्शन किए लौटने को विवश हुए। देर रात सकुशल घर वापस लौटते ही यह लोग परिजनों से लिपट कर रोने लगे।