उन्नाव। जनपद में एक के बाद एक मनरेगा घोटाले प्रकाश में आ रहे हैं। पुरवा विकासखंड के भाटमऊ ग्राम पंचायत में 15 लाख रुपये के घोटाले में अभी कार्रवाई पूरी भी नहीं हुई थी कि सुमेरपुर के पनई बुजुर्ग में निर्माण कार्यों में मनरेगा धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। 82 हजार रुपये के घोटाले की धनराशि की रिकवरी प्रधान, सचिव व टीए से कराने की संस्तुति जांच अधिकारी ने सीडीओ से की है।
सुमेरपुर पनई बुजुर्ग निवासी जितेंद्र कुमार ने गांव में निर्माण कार्यों में धांधली की शिकायत सीडीओ से की थी। सीडीओ के निर्देश पर लघु सिंचाई के सहायक अभियंता डीपी वर्मा ने करीब 20 कार्यों की मौके पर जाकर जांच की जिनके नाम पर पैसा निकाला गया। 82801 रुपये की धांधली सामने आईं। इस धनराशि के दुरुपयोग में प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक को बराबर का दोषी पाया गया। सहायक अभियंता ने सीडीओ को भेजी गई जांच रिपोर्ट में 82801 रुपये की बराबर-बराबर वसूली (27600 रुपये प्रत्येक) प्रधान मुखिया, सचिव रामबहादुर व तकनीकी सहायक उमेश कुमार से करने की संस्तुति की है।
इनसेट.......
यह थे कुछ कार्य
1-ककरऊ मॉडल तालाब घाट व बाउंड्रीवाल निर्माण में मानकों का उल्लंघन पाया गया। ईंटें, लेबर व सीमेंट का कम प्रयोग किया गया। ईंट दोयम दर्जे की लगाई गईं।
2- छेद्दू पासी की कालोनी से सतीनंद मास्टर के दरवाजे तक मिट्टी कार्य। इसमें भी घालमेल पाया गया।
3- सितूल के खेत से नहरिया तक खड़न्जा। इस कार्य के भुगतान में अनियमितता बरती गईं। प्रस्ताव कम का था और भुगतान ज्यादा का कराया गया।
इंसेट-2
कई ग्राम पंचायतों में हो चुका है घोटाला
जिले की कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा धन का जमकर दुरुपयोग किया गया। गौरी त्रिभानपुर, दरियापुर, राजेपुर ग्रंट, हयासपुर, भाटमऊ आदि ग्राम पंचायतों में कागजों पर कार्य दिखाकर लाखों रुपये का बंदरबांट किया गया। विकास भवन के सूत्रों की मानें तो सीबीआई को जो अभिलेख भेजे गए हैं उनमें वर्ष 2007 से 2010 तक करीब 300 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। इस धनराशि को गांवों में विकास कार्यों में खर्च होना दर्शाया गया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जिले के कई गांवों में अभी भी ग्रामीण मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं।