उन्नाव। 35 साल बाद शहर सीमा का विस्तार करने की कवायद शुरू कर दी गई है। शासन के आदेश के बाद नगर पालिका सर्वे का काम पूरा कराने के बाद रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है। इसे बोर्ड बैठक में पास कराने की तैयारी पालिका कर रहा है। इसके बाद प्रस्ताव को शासन को भेज दिया जाएगा।
उन्नाव नगर पालिका परिषद का वर्ष 1884 में गठन हुआ था। अस्तित्व में आने के बाद वर्ष 1979 में पहली दफा नगर पालिका ने शहरी क्षेत्र सीमा का विस्तार किया। 1979 में किए गए सीमा विस्तार में नगर पालिका का क्षेत्रफल 15.50 वर्ग किलोमीटर दर्ज किया गया था। 1979 में हुए पहले सीमा विस्तार के बाद 35 वर्षों तक नगर पालिका का सीमा विस्तार नहीं हो सका। हालांकि इस बीच शहरी क्षेत्र 15.50 वर्ग किलोमीटर के दायरे से बढ़कर 21.50 किलोमीटर तक पहुंच गया। शहरी क्षेत्र के बढ़ने पर नगर पालिका के अधिकारियों ने 29 जनवरी वर्ष 2009 में कांशीराम कालोनी व 29 मई 2009 को राजस्व ग्राम बरबट के 390.712 हेक्टेयर क्षेत्र को नगर पालिका से जोड़ने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। लेकिन किन्हीं कारणों से नगर पालिका के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी नहीं मिल सकी। इस बीच हाल ही में नगर विकास विभाग ने नगर पालिका से सीमा विस्तार के संबंध में प्रस्ताव मांगा है।
तो कांशीराम कालोनी के भी बहुरेंगे दिन
उन्नाव। शहरी सीमा विस्तार के बाद कांशीराम कालोनी के दिन भी बहुरेंगे। वर्तमान में जिस जगह पर कांशीराम कालोनी का निर्माण किया गया है वह नगर पालिका क्षेत्र में नहीं आता है। इससे नगर पालिका कांशीराम कालोनी में न ही सफाई कार्य करा पाता है और न ही कोई विकास कार्य। ऐसे में नगर पालिका ने कांशीराम कालोनी को शहरी क्षेत्र में जोड़ने की मांग की है।
कैसे होता है विस्तार
उन्नाव। नगर पालिका अधिशासी अधिकारी रोली गुप्ता ने बताया कि नगर पालिका परिषद अधिनियम में दी गई व्यवस्था के आधार पर क्षेत्रों को चिह्नित किया जाता है। इसके बाद पालिका परिषद बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास करते हुए शासन को मंजूरी के लिए भेजा जाता है। शासन परीक्षण करने के बाद शहरी सीमा विस्तार की अनुमति देता है।