उन्नाव। दबंगों पर कार्रवाई करने में जिला प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। परिणाम यह है कि पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। सरकारी अधिकारी व कर्मचारी भी दबंगों का साथ दे रहे हैं। बांगरमऊ थानाक्षेत्र के गंजमुरादाबाद के ग्राम छोट्टापुरवा में चकबंदी और चक परिवर्तन होने के चार माह बाद भी पीड़ित को कब्जा नहीं मिल पाया है। मामले को लेकर पीड़ित ने विभिन्न अधिकारियों से लेकर डीएम को अब तक सात प्रार्थनापत्र दिए लेकिन कोई कब्जा नहीं मिल पाया है। इससे दुखी होकर पीड़ित ने आत्महत्या करने की धमकी दी है।
गंजमुरादाबाद के मजरा चोहरा ग्राम छोट्टापुरवा निवासी करन पुत्र मथुरा ने 6 जनवरी को डीएम को दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि 5 सितंबर 13 को उसका चक (खेत) परिवर्तन न्यायालय उपसंचालक चकबंदी ने किया था। जबकि उसकी जमीन को चकबंदी विभाग ने रुपराम, गंगाप्रसाद, शिवम पुत्रगण बाबूराम को नाप दी। इन लोगों ने नाप की जमीन पर कब्जा कर लिया जबकि जहां उसका चक परिवर्तन किया गया वहां पर उसे कब्जा नहीं मिल पाया है। दबंग उस पर कब्जा नहीं छोड़ रहे हैं। अपने कब्जे व निशानदेही के लिए करन ने पहला प्रार्थनापत्र 30 नवंबर, दूसरा प्रार्थनापत्र 4 दिसंबर और तीसरा प्रार्थनापत्र 10 दिसंबर को उपसंचालक चकबंदी उन्नाव को दिया। सुनवाई न होने पर पांचवा प्रार्थनापत्र प्रभारी निरीक्षक बांगरमऊ, छठा डीएम व सातवां चकबंदी आयुक्त लखनऊ को भेजा। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। हारकर उसने 6 जनवरी को आठवां प्रार्थनापत्र पुन: डीएम को देते हुए इसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री व राजस्व मंत्री को भेजी है। पीड़ित करन का कहना है कि यदि 14 जनवरी तक निशानदेही/कब्जा न दिलाया गया तो वह आत्महत्या कर लेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी चकबंदी लेखपाल, चकबंदीकर्ता, सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदी अधिकारी व उपसंचालक चकबंदी अधिकारी उन्नाव की होगी। मामले में चकबंदी आयुक्त ने डीएम/जिला उप संचालक चकबंदी को पत्रांक संख्या 148/प.सा.-23/13 जारी करके मामले की जांच कराने और कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे, लेकिन यह भी पीड़ित को जमीन पर कब्जा नहीं दिला सका।