फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिंचाई के लिए तीन घंटे बिजली!

विज्ञापन
विज्ञापन
उन्नाव। पावर कारपोरेशन की ओर से गांवों के लिए जारी बिजली के नए रोस्टिंग शेड्यूल से किसानों को सिंचाई के लिए मात्र तीन घंटे ही मिलेंगे। नए आपूर्ति शेड्यूल के अनुसार, ग्र्रामीण इलाकों को दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक कुल 5 घंटे बिजली दी जाएगी। इससे किसानों को सिंचाई करने के लिए मात्र तीन घंटे का ही समय मिलेगा क्योंकि 5 बजते ही सूर्यास्त होने के बाद ठंड का कहर बढ़ जाता है। साथ ही अंधेरा भी होने लगता है। ऐसे में सिंचाई करना मुश्किल होगा।
विज्ञापन

वर्तमान समय में आलू व गेहूं की सिंचाई के मद्देनजर पावर कारपोरेशन ने किसानों को कथित राहत देते हुए ग्रामीण इलाकों के लिए बिजली का नया रोस्टिंग शेड्यूल लागू किया है। अभी तक गांवों को एकमुश्त 10 घंटे बिजली दी जा रही थी। ग्रामीण इलाकों को सप्ताहवार दिन व रात को 10-10 घंटे आपूर्ति दी जा रही थी। इधर बिजली विभाग ने आलू व गेहूं की फसल की सिंचाई की जरू रत को देखते हुए बिजली आपूर्ति के रोस्टिंग शेड्यूल में बदलाव किया है। जो नया शेड्यूल लागू किया गया है उसके तहत गांवों को सिंचाई के लिए एकमुश्त 10 घंटे नहीं बल्कि दिन व रात में पांच-पांच घंटे बिजली मिलेगी। दिन में दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक आपूर्ति दी जाएगी। इसके अलावा रात में 2 से सुबह 6 बजे तक गांवों को रोशन किया जाएगा।
विभाग के अधिशाषी अभियंता प्रथम रामबुझारत ने बताया कि पावर कारपोरेशन की ओर से जो पत्र आया है उसके मुताबिक इस समयसारणी के अनुसार ही गांवों को 9 घंटे बिजली दी जाएगी। 5 जनवरी तक यह व्यवस्था लागू रहेगी।
विज्ञापन


...तो क्या ठंड व अंधेरे में करेंगे सिंचाई
उन्नाव। नया बिजली शेड्यूल ग्रामीणों के गले नहीं उतर रहा है। नवाबगंज के रामबहादुर, गंजमुरादाबाद के सुघर सिंह, अजगैन के श्याम सुंदर, बांगरमऊ के रामदीन, पुरवा के रामऔतार आदि किसानों ने कहा कि क्या ठंड में सिंचाई करेंगे। इस समय शाम 5 बजे के करीब ही सूर्यास्त हो जाने से अंधेरा होने लगता है। इसके बाद ठंड बढ़ जाती है सो अलग। वहीं रात को आपूर्ति के लिए जो समय निर्धारित किया गया है उस दौरान तो कोई काम नहीं हो पाएगा। रात को 2 बजे से भोरपहर 6 बजे तक कुल 4 घंटे ही बिजली मिलेगी। इससे तो 10 घंटे का एकमुश्त बिजली देने का शेड्यूल ही ठीक था। कम से कम दिन के सप्ताह में कुछ काम तो हो जाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें