उन्नाव। बीमित माल के चोरी हो जाने के बाद भी अवध ग्रामीण बैंक ने बीमे की राशि नहीं दिलवाई। पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। फोरम ने बैंक को 80 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए। साथ ही बैंक को तीन हजार रुपए परिवाद व्यय और 18 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज क्षतिपूर्ति की राशि पर देना होगा।
तहसील पुरवा के ग्राम ऊंचगांव सानी निवासी अश्वनी कुमार व पवन कुमार ने 2 दिसंबर 2009 को अवध ग्रामीण बैंक शाखा अकवाबाद ओसियां से सवा दो लाख रुपए का ऋण लेकर लकड़ी व फर्नीचर का व्यवसाय शुरू किया था। उन्होंने बैंक से ही दुकान का बीमा कराया था। इसके एवज में 13 जनवरी 2010 को बैंक द्वारा 1831 रुपए की राशि बीमे की किश्त के रुप में काट ली गई। 28/29 जुलाई 2010 की रात दुकान से कई कुर्सियां, प्लाई के पल्ले, गद्दे व 10 हजार रुपए चोरी हो गए। पीड़ित ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद व्यवसाइयों ने बैंक से दुकान के बीमे के कागजात की मांग की लेकिन कागजात नहीं मिले। 2 जून 2011 को पीड़ित ने अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भिजवाया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल किया। फोरम में बैंक ने स्वीकार किया कि परिवादीगण ने लोन लिया था। चोरी की सूचना मिलना भी माना। बैंक ने बताया कि उन्होंने मामले की सूचना से संबंधित पत्र बीमा कंपनी को भेजे थे। उनकी ओर से सेवा में कमी नहीं की गई है। जो भी कमी है वह बीमा कंपनी की है। बीमा कंपनी ने प्रतिवाद किया कि 26 नवंबर 2011 को उनको बैंक का पत्र प्राप्त हुआ और घटना की जानकारी हुई। 12 जनवरी 2012 को उन्होंने पत्र द्वारा बैंक को यह सूचना दी कि वह सूचना का साक्ष्य, बीमा पालिसी की प्रति और एफआईआर की प्रति व चोरी से हुई हानि का स्टीमेट भेजें जो बैंक ने नहीं दिया। इसलिए उनकी ओर से कोई कमी नहीं की गई है। फोरम ने टिप्पणी की कि वास्तव में बैंक द्वारा बीमा कंपनी को सूचना नहीं दी गई और जब परिवाद योजित हो गया तो उनके द्वारा यह साक्ष्य बनाया गया है। इसलिए बैंक ने घोर लापरवाही बरती और सेवा में कमी की है। फोरम ने बैंक को पीड़ित को 80 हजार रुपए बतौर क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं। साथ ही परिवाद व्यय के रुप में तीन हजार व क्षतिपूर्ति राशि पर 18 फीसदी सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा।