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काल बन सकती हैं पुरानी जर्जर इमारतें

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उन्नाव। चार दिन पहले मुंबई में आफत की बारिश में दशकों पुरानी तीन मंजिला इमारत ढह गई। इसमें कई जिंदगियां मौत के गाल में समां गई। शहर की अति व्यस्त घनी आबादी में भी सैकड़ों साल पहले बने आलीशान मकान जर्जर हो गए हैं।
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भवनों की लटकती दीवारें व गिरता प्लास्टर किसी भी दिन मुंबई जैसे हादसे का गवाह बन सकता है। जर्जर भवनों के नीचे बसे दुकानदारों के साथ ही राहगीरों में खौफ है। फिलहाल प्रशासन की तरफ से भवनों को ध्वस्त कराने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

मुंबई में इमारत ढहने से 21 लोगों की मौत से उन्नाव शहर के पुराने व व्यस्त बाजारों में बने दशकों पुराने जर्जर भवनों का प्रकरण फिर से ताजा हो गया है। इन जर्जर इमारतों से हर रोज गिर रहे प्लास्टर के टुकड़ों से लोगों में दहशत है। इनके कभी भी ढहने की आशंका में दुकानदार चिंतित हैं।
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बड़ा चौराहा से छोटा चौराहा के बीच करीब आधा दर्जन भवन ऐसे हैं जो सौ साल से अधिक पुराने हैं। शहर के मुख्य बाजार धवन रोड पर खोया मंडी के पास बना जर्जर भवन किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकता है। केसरगंज, छिपियाना समेत कई मोहल्ले में भी दशकों पुराने भवन कमजोर होकर धीरे-धीरे गिर रहे हैं। इन भवनों के आस पास रहने वाले लोग ही नहीं राहगीर भी हादसे को लेकर खौफजदा हैं।

नगर पालिका परिषद से उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने जर्जर भवनों को चिह्नित करना व अन्य जरूरी बिंदुओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट रामप्रसाद ने बताया कि नगर पालिका और यूडीए के माध्यम से ऐसी इमारतों का चिह्नित कराया जाएगा और कोई हादसा न हो इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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-शहर की घनी आबादी और मुख्य मार्ग पर कभी भी हो सकता है हादसा
-मुंबई हादसे के बाद भी नहीं चेत रहा प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
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