वारिस तय करने में बैंक अफसरों को छूट रहे पसीने
उन्नाव। कर्जमाफी योजना के लाभार्थियों की सूची के सत्यापन में अब तक चार हजार से अधिक मृतकों के नाम सामने आए हैं। मृतकों के वारिस योजना का लाभ पाने के लिए बैंकों तक नहीं पहुंच रहे हैं। इससे बैंक अधिकारियों को इन्हें ढूंढने में पसीने छूट रहे हैं। इसके चलते मृतकों के वारिसों को कर्जमाफी योजना का लाभ मिलने में संशय बढ़ गया है।
बैंकों के तैयार की गई सूची में 104111 किसान कर्ज माफी के दायरे में हैं। सत्यापन में छह तहसीलों में 4344 लाभार्थियों की मौत हो जाने की पुष्टि हुई है। नियमानुसार मृतकों के वारिसों को योजना का लाभ दिया जा सकता है।
वारिस तय करने का अधिकार बैंकों को दिया गया है। बैंक प्रशासन को वारिस ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इससे फिलहाल वारिसों को योजना का लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है।
वारिस तय करने का काम बैंक का
तहसीलों से मृतकों की सूची आ गई है। लाभार्थी की मौत हो जाती है तो उसके वारिस को योजना का लाभ दिया जा सकता है। वारिस तय करने का काम बैंक का है। इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी जा चुकी है।
अतींद्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी, उन्नाव।
12 हजार खातों में लिंक नहीं आधारकार्ड
पहले चरण में 20132 किसानों को कर्जमाफी का लाभ दिया जा चुका है। दूसरे चरण में 22679 किसानों को छह अक्तूबर से प्रमाणपत्र दिए जाने हैं। इसके बाद भी 12117 खाताें से आधारकार्ड लिंक नहीं हो पाए हैं। सूत्रों की मानें तो इनमें से काफी किसानों ने बैंकों से कर्जा ले रखा है। इसी से यह आधारकार्ड उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
- कर्ज माफी योजना के लाभार्थियों में चार हजार मृतक,
कर्ज माफी योजना का लाभ पाने के लिए सामने नहीं आ रहे वारिस
अमर उजाला ब्यूरो