अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बने बिहार-बरुआ संपर्क मार्ग के खस्ताहाल होने पर अनुरक्षण (मरम्मत) न कराने पर फर्म की 60 लाख की सिक्योरिटी जब्त कर ली गई है। वहीं शेष 25 लाख की वसूली के लिए डीएम के माध्यम से मऊ डीएम को आरसी भेजी गई। मऊ डीएम ने भी फर्म को आरसी जारी कर दी है।
वर्ष 2016 में पीएमजीएसवाई योजना के तहत 11 किलोमीटर लंबे बिहार-बरुआ संपर्क मार्ग का डामरीकरण कराया गया था। यह काम मऊ की फर्म मेसर्स ओम इंजीनियर्स को दिया गया था। विभागीय सूत्रों की मानें तो करीब 4 करोड़ की लागत से निर्मित सड़क में कमीशनबाजी का जमकर खेल किया गया।
परिणामस्वरूप सड़क दो साल में ही दम तोड़ गई। जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। पटरी कट गई है। इसके बाद फर्म को नोटिस भेजकर सड़क की मरम्मत कराने को कहा गया। लगातार कई रिमाइंडर भेजने के बाद भी फर्म ने मरम्मत को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसकी जानकारी जब शासन तक पहुंची तो सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। इसके बाद फर्म पर कार्रवाई के आदेश दिए गए। विभागीय अधिकारियों ने जांच पड़ताल के बाद फर्म पर 85 लाख रुपये की वसूली निकाली।
इसके बाद इस धनराशि को जमा करने के आदेश फर्म संचालक को दिए गए। जब संचालक ने धनराशि जमा नहीं की तो फर्म की जमा 60 लाख रुपये की सिक्योरिटी जब्त कर ली गई। वहीं शेष धनराशि 25 लाख की वसूली के लिए आरसी जारी की गई। एक्सईएन पीएमजीएसवाई बीके राजपूत ने बताया कि जो फर्म संपर्क मार्गों का निर्माण कराती है। उसे पांच साल तक मार्ग का अनुरक्षण भी करना होता है। मेसर्स ओम इंजीनियर्स ने ऐसा नहीं किया। जिस पर उसकी सिक्योरिटी जब्त करने के साथ ही शेष धनराशि की वसूली के लिए डीएम के माध्यम से आरसी जारी करा दी गई है। उन्होंने बताया कि जो भी ठेकेदार अनुरक्षण कार्य में लापरवाही करेगा तो उसके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
-मऊ की मेसर्स ओम इंजीनियर्स ने किया था बिहार-बरुआ संपर्क मार्ग का निर्माण
-शेष 25 लाख की वसूली को जिलाधिकारी ने मऊ डीएम के जरिये भेजी आरसी