उन्नाव। विकासखंड मियागंज के दो ग्राम प्रधानों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। एक ग्राम पंचायत में तो बिना काम कराए ही हजारों रुपये निकाल लिए गए। वहीं, दूसरी ग्रामसभा में मानकों को ताक पर रखकर शौचालय बना दिए गए। जांच में इसकी पुष्टि होने पर डीएम ने प्रधानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं, डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि संतोषजनक उत्तर न मिलने पर प्रधानों के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार सीज किए जाएंगे।
मियागंज विकासखंड की ग्राम पंचायत आसीवन तरफ कादिरपुर में कागजों पर खड़ंजा निर्माण दिखाकर प्रधान और सचिव ने हजारों रुपये का गबन कर लिया। 19 जनवरी को सहायक विकास अधिकारी पंचायत ने गांव में जाकर निर्माण कार्यों का सत्यापन किया था। अभिलेखीय जांच में पाया कि कैलाश के घर से श्रीराम के घर तक खड़ंजा निर्माण दिखाया गया। माप पुस्तिका में इस कार्य की लागत 68760 रुपये दर्शायी गई, जबकि काम मौके पर नहीं मिला।
अभिलेखीय जांच और मौके के सत्यापन में पता चला कि प्रधान और सचिव ने मिलकर यह धनराशि निकाल ली है। दोनों के हजारों रुपये हड़पने की रिपोर्ट मिलने पर डीएम ने प्रधान मालती को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है। वहीं सचिव को नोटिस जारी करने का आदेश डीपीआरओ को दिया है।
उधर, विकासखंड मियागंज की ग्राम पंचायत सिर्सकन्हर में बने शौचालयों का सत्यापन स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के जिला समन्वयक श्रीषनारायण व संजीव यादव ने 8 जनवरी को किया था। जांच में पता चला कि गांव को 143 शौचालयों के लिए 1716000 रुपये दिए गए। फोटो मात्र 117 शौचालयों की ही अपलोड की गई। वहीं बेसलाइन से छूटे 66 लाभार्थियों को शौचालय आवंटित किए गए। इसके लिए 792000 रुपये पंचायत के खाते में भेजे गए।
जांच के दौरान मात्र 9 शौचालयों का ही निर्माण शुरू होना पाया गया। शौचालयों का निर्माण मानक के विपरीत मिला। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान कमलकिशोर गौड़ को डीएम ने नोटिस जारी की है। सचिव पंकज कुमार को नोटिस जारी करने के लिए डीपीआरओ से कहा गया है।
वहीं, इस बाबत जिलाधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि दो प्रधानों को नोटिस जारी की गई है। सचिवों को नोटिस जारी करने के आदेश डीपीआरओ को दिए गए हैं। जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर प्रधानों के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार सीज किए जाएंगे।