पाटन(उन्नाव)। लॉकडाउन के कारण मुंबई में फंसे उन्नाव जिले के बिहार थानाक्षेत्र के रहने वाले 11 लोग ट्रक से वापस अपने घर आ रहे थे। रास्ते में मध्यप्रदेश के गुना जिले में बुधवार रात ट्रक पलटने सेे तीन युवकों की मौत हो गई जबकि 8 की हालत गंभीर है। सूचना घर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया।
बिहार कस्बे के जानकीगंज मोहल्ला निवासी अजीत (26) अपने छोटे भाई रंजीत (25) व मोहल्ले के ही सच्चू (25) पुत्र सागर, सोनू (24) पुत्र राजकुमार, श्यामू (24) पुत्र रामपाल, झूरी (26) पुत्र रामचरण व अर्जुन (25) के साथ मुंबई के दादर में किराने की अलग-अलग दुकानों में नौकरी कर जीविकोपार्जन कर रहे थे। इसी थानाक्षेत्र के छाछीराईखेड़ा गांव निवासी दिलीप (35) पुत्र जमुना प्रसाद पाल, हरिशंकर पाल (45) व इंद्रपाल (35) और सांझामऊ निवासी रमेश पाल (43) पुत्र रामप्रसाद पाल भी वहीं काम करते थे। लॉकडाउन के कारण सभी काफी दिनों से वहीं फंसे थे। सभी ने मुंबई में रहकर ट्रक चलाने वाले छाईराई खेड़ा निवासी सर्वेश से संपर्क किया और कई अन्य लोगों के साथ उसके ट्रक से वापस लौट रहे थे। बुधवार रात ट्रक मध्यप्रदेश के गुना में सड़क हादसे में ट्रक पलट गया।
हादसे में जानकीगंज मोहल्ला निवासी अजीत, छाईराई खेड़ा निवासी दिलीप व सांझामऊ निवासी रमेश पाल की मौत हो गई। जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल अर्जुन ने गुरुवार सुबह फोन करके परिजनों को हादसे की सूचना दी तो कोहराम मच गया। अजीत तीन भाइयों में बड़ा था। छोटा भाई रंजीत उसके साथ ही मुंबई में काम करता था जबकि सबसे छोटा भाई सुजीत मां ज्ञानवती व पिता राजकुमार के साथ गांव में रहता है। खेत न होने से माता-पिता दोनों की मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं। अजीत की मौत ने सभी को झकझोर दिया।
बिहार थाना क्षेत्र के छाछीराईखेड़ा गांव निवासी दिलीप (35) पुत्र जमुना प्रसाद पाल की भी गुना में हुए हादसे में मौत हो गई। वह भी एक वर्ष पहले कमाने के लिए मुंबई गया था। वह मिठाई की दुकान में काम कर रहा था। उसकी मौत से पिता के अलावा मां रामकली, पत्नी मंजू पाल, पुत्री दिव्या पाल (8) व पुत्र नवदीप पाल (5) का रो-रोकर बुरा हाल है।
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले सांझामऊ निवासी रमेश पाल (43) पुत्र रामप्रसाद पाल मुंबई में रहकर ऑटो चलाता था। उसकी पत्नी शांति पीजीआई लखनऊ में संविदा पर कार्यरत है, जो अपनी 18 वर्षीय बेटी प्रतिमा, 14 वर्षीय प्रियंका व 10 वर्षीय बेटे यश के साथ लखनऊ में रहती है। बच्चे लखनऊ में ही पढ़ रहे हैं। रमेश व उसकी पत्नी दोनों अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए मेहनत कर रहे थे। रमेश की मौत से पत्नी बच्चों व परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।