उन्नाव। जिले के 10 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में तख्त की कमी है। हालात यह हैं कि अधिकांश छात्राओं को इस ठंड में फर्श पर बिस्तर लगाने पड़ रहे हैं। इससे छात्राओं के बीमार होने का डर है। हालांकि जिला समन्वयक का कहना है कि उन्होंने दो सौ तख्त खरीदने की फाइल चलाई है।
कस्तूरबा स्कूलों में उन परिवारों की छात्राओं का प्रवेश लिया जाता है जो कभी स्कूल न गईं होें, उनके माता-पिता न हो या फिर दिव्यांग हों। ऐसी छात्राओं का चिन्हांकन कराकर उनका दाखिला इन आवासीय स्कूलों में कराया जाता है। जिले के 16 में से 13 ब्लाकों में एक-एक आवासीय विद्यालय है। प्रत्येक स्कूल में 100 छात्राएं हैं।
छात्राओं के भोजन, यूनिफार्म और पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार उठाती है। इनमें से बिछिया, नवाबगंज, हसनगंज, सफीपुर, फतेहपुर चौरासी, गंजमुरादाबाद, मियागंज असोहा, पुरवा, सिकंदरपुर सरोसी के आवासीय विद्यालयों में प्रत्येक में 15 से 20 तख्त कम हैं। यहां रहकर पढ़ाई करने वाली छात्राओं को जमीन पर बिस्तर लगाने पड़ रहे हैं।
गर्मी के दिन तो जैसे-तैसे कट गए, लेकिन ठंड शुरू होते ही छात्राओं को मुश्किल हो रही है। शासनादेश के मुताबिक एक स्कूल में 50 तख्त होने चाहिए। लेकिन हिलौली, बांगरमऊ व औरास को छोड़कर कोई ऐसा स्कूल नहीं जिसमें तख्त की संख्या पूरी हो।
कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की जिला समन्वयक विजय लक्ष्मी तिवारी ने बताया कि दस कस्तूरबा स्कूलों में तख्तों की कमी है। खरीद के लिए पत्रावली तैयार कर डीएम को भेजी है। स्वीकृत होते ही तख्तों की खरीद कर छात्राओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
कंबल - रजाई की कमी नहीं
जिला समन्वयक विजय लक्ष्मी ने बताया कि सर्दी को देखते हुए स्कूलों में कंबल व रजाई की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। छात्राओं को ठिठुरने नहीं दिया जाएगा। जहां पर इसकी कमी थी वह भी पूरी करा ली गई है। उनका कहना है कि इसके लिए कोई स्पेशल बजट नहीं आता। स्कूलों मेें व्यवस्थाओं के रख रखाव के लिए जो मद जारी होता है। उसी से व्यवस्थाएं दुरुस्त करानी पड़ती हैं।
जिले के दस कस्तूरबा स्कूलों में तख्त की कमी
कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में दो छात्राओं के बीच एक तख्त के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो