बीमा कंपनी पर 5 हजार जुर्माना
उन्नाव। बीमित भैंस की मौत के बात क्लेम देने में टालमटोल करने से बीमा कंपनी पर उपभोक्ता फोरम ने 5 हजार का जुर्माना ठोंका है। साथ ही पशुपालक को बीमित धनराशि के साथ उस पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वास्तविक भुगतान की तिथि तक अदा करने के आदेश दिए हैं। फोरम ने यह भी आदेश दिया है कि दो माह में भुगतान न करने पर वाद दायर करने की तिथि से 1 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा।
सदर तहसील की देवपुर पोस्ट खरौली निवासी गयाप्रसाद पुत्र रज्जू ने 13 फरवरी 2013 को अपनी भैंस का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। पशुचिकित्साधिकारी सिंकदरपुर करन से भैंस की टैगिंग की गई। उस समय उसने भैंस का फोटो खींचकर बीमा कंपनी को दिया था। 9 सितंबर को भैंस की मौत हो गई। इसकी सूचना उसने संबंधित अधिकारियाें को दी। इस पर भैंस का पोस्टमार्टम किया गया।
सभी प्रपत्रों के साथ उसने बीमा कंपनी में क्लेम के लिए दावा किया। कंपनी ने दावा निरस्त कर दिया। इससे नाराज किसान ने उपभोक्ता फोरम में कंपनी और पशु चिकित्साधिकारी को पार्टी बनाते हुए वाद दायर कर दिया। मामले की सुनवाई में बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मांगे जाने पर भी बीमा धारक ने जीवित भैंस का फोटो प्रस्तुत नहीं किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष मातांबर सिंह ने कहा कि कंपनी का दायित्व बीमा की धनराशि अदा करना होता है। फोरम ने आदेश जारी किया कि बीमा कंपनी मृत भैंस की पालिसी में दर्शाई गई बीमा धनराशि के साथ उस पर वाद दायर करने की तिथि से 8 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी पालिसी धारक को अदा करे।
इसके साथ ही पालिसी धारक को मानसिक तथा शारीरिक कष्ट के लिए 5 हजार रुपये दो माह के अंदर अदा करे। फोरम ने परिवादी को 250 रुपये परिवाद व्यय के रूप में भी बीमा कंपनी को देने के आदेश दिए हैं। दो माह में भुगतान न करने की दशा में ब्याज 1 प्रतिशत की दर से चुकाना होगा।
- बीमित भैंस की मौत के बाद क्लेम देने में आनाकानी पर उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला, बीमित धनराशि के साथ उस पर आठ प्रतिशत ब्याज की दर से वास्तविक भुगतान की तिथि तक अदा करने के दिए आदेश
अमर उजाला ब्यूरो