उन्नाव। जनपद की करीब आधा दर्जन ग्राम पंचायतों में अभी तक एक पैसे का काम नहीं हुआ है। यह वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है और विकास कार्य नहीं शुरू हो पाए हैं। इन ग्राम पंचायतों के सैकड़ों मनरेगा जॉबकार्डधारक काम के लिए भटक रहे हैं। काम न मिलने के एवज में मजदूरी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। मनरेगा उपायुक्त ने 10 ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों का वेतन रोक दिया है।
जनपद में 954 ग्राम पंचायतें हैं। जिला प्रशासन की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रति माह एक लाख रुपये खर्च किए जाएं। इससे गांवों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और जॉबकार्डधारकों को मजदूरी के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा।
अप्रैल 2014 से वित्तीय वर्ष 2014-15 शुरू हुआ था। 31 मार्च को यह वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाएगा। वर्ष 2014-15 को समाप्त होने में मात्र 10 दिन का समय शेष है इसके बाद भी जिले की पांच ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां पर एक भी पैसे का विकास कार्य नहीं हुआ है। वहीं पांच अन्य ग्राम पंचायतों में किसी में तीन हजार तो किसी में पांच हजार रुपये ही खर्च किए गए हैं। प्रतिमाह एक लाख रुपये खर्च करने के निर्देश इन ग्राम पंचायतों में हवाहवाइर् साबित हो रहे हैं।
जानकारों की मानें तो पैसा होने के बाद भी खर्च करने में हीलाहवाली से गांवों में विकास की गंगा नहीं बह पा रही है। ग्रामीण सड़क, पानी आदि की समस्याओं से जूझ रहे हैं। मामले की जानकारी जब उच्चाधिकारियों को हुई तो उन्होंने ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। इसके बाद भी गांवों में काम शुरु नहीं कराए गए हैं।
मनरेगा उपायुक्त श्रम/रोजगार, राजेश कुमार मिश्र ने बताया कि कई ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां अभी तक कोई भी कार्य नहीं शुरू किया गया है। उनके पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है।