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मनरेगा में 741 दिनों का फ र्जी कार्य दिखाकर हड़पे 1.34 लाख

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हसनगंज(उन्नाव)। विकासखंड के गांव पमेधिया में मनरेगा में फर्जी काम दिखाकर लाखों रुपये हड़पने का मामला प्रकाश में आया है। एडीओ कोऑपरेटिव की जांच में इसका खुलासा होने पर अब बीडीओ ने प्रधान व सचिव से रिकवरी कराने के लिए सीडीओ को पत्र भेजने की तैयारी की है।
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पमेधिया गांव के कुछ ग्रामीणों ने बीडीओ को शिकायतीपत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव में मनरेगा से फर्जी कार्य दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। बीडीओ केएन पांडेय ने मामले की जांच एडीओ कोऑपरेटिव प्रमोद शर्मा को सौंपी। एडीओ ने गांव जाकर जांच-पड़ताल की। वहीं, अभिलेखों की पड़ताल की। इसमें 17 दंपति (पति, पत्नी का अलग अलग) जॉबकार्डों में 741 दिनों का काम देना दिखाया गया। जिसमें 1.34 लाख रुपये निकाले गए।
एडीओ ने बताया कि जांच में पति के साथ पत्नी का भी जॉबकार्ड बना हुआ मिला। पति ने जितना काम किया उतने काम की मजदूरी पत्नी के खाते में भी भेज दी गई। जबकि नियमानुसार एक घर में एक ही जॉबकार्ड जारी हो सकता है। परिवार का दूसरा सदस्य काम मांगता है तो पहले से जारी जॉबकार्ड में उसका नाम भी शामिल कर लिया जाएगा। ऐसे 17 दंपति के अलग-अलग जॉबकार्ड बने मिले। पूर्व की मजदूरी 182 रुपये थी। 741 दिनों के हिसाब से कुल गबन 134862 रुपये का निकला है। रिपोर्ट बनाकर बीडीओ को भेज दी गई है।
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ग्राम पंचायत अधिकारी लल्लू लाल ने बताया कि 15 दिन पहले ही मौखिक रूप से चार्ज मिला है लेकिन यह प्रकरण उनके समय का नहीं है। पूर्व में तैनात ग्राम विकास अधिकारी प्रेम कुमार के समय का मामला है। बीडीओ केएन पांडेय ने बताया कि जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। प्रधान रामदुलारी व सचिव प्रेम कुमार से गबन की धनराशि रिकवरी के लिए सीडीओ को पत्र भेजा जा रहा है। धनराशि की रिकवरी श्रमिकों से नहीं की जाएगी।
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