रंग भी वही, कागज भी वही और अंदाज भी हूबहू चित्रकारों सा। बस, इन्हें बनाने वाले वे लोग हैं जो जेल की सलाखों के पीछे अपने अपराधों की सजा काट रहे हैं। जेल में बंद कैदियों की कल्पनाएं जब रंगों में सजी तो एक से बढ़कर एक उम्दा चित्रों का जमघट सा लग गया।
उत्तर प्रदेश की 25 जेलों में बंद कैदियों द्वारा बनाई गई 80 से अधिक कृतियों की प्रदर्शनी ‘काराकृति-आंख में आंसू, कैद में सपने’ बुधवार से कैसरबाग के राज्य ललित कला अकादमी की लाल बारादरी परिसर में शुरू हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कारागार मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैय्या ने किया।
प्रदर्शित अधिकतर चित्रों को बंदियों ने डिप्टी जेलर संतोष वर्मा की देखरेख में बनाए हैं। प्रदर्शनी में नारी बंदी निकेतन की महिला बंदियों की बनाई घरेलू कृतियों को भी लोगों ने सराहा। मौके पर अकादमी सचिव डॉ. वीना विद्यार्थी, कारागार राज्य मंत्री इकबाल महमूद, प्रमुख सचिव गृह-कारागार आरएम श्रीवास्तव, महानिरीक्षक कारागार और अपर महानिरीक्षक कारागार समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे। प्रदर्शनी बृहस्पतिवार को भी खुली रहेगी।
राजा भैय्या ने ढूंढ ली जफर की पेंटिंग
सीएम के साथ मुख्य वीथिका में टहल रहे कारागार मंत्री रघुराज प्रताप सिंह प्रदर्शनी में लगे चित्रों में कुछ तलाशते दिखे। उन्होंने कुछ अधिकारियों से पूछा कि बरेली सेंट्रल जेल के कैदियों के बनाए गए चित्र कहां हैं? इस पर अधिकारियों ने दूसरी दीवार की ओर इशारा किया ही था कि राजा भैय्या ने दूर से ही पहचान लिया कि सामने वाली पेंटिंग उनके साथ कभी जेल साझा करने वाले जफर खान की है। भारत माता के चित्र को जफर ने ऐसा उकेरा कि खुद सीएम भी कलाकारी का अंदाज देखते रहे।
जावेद व रवीन्द्र के चित्रों में दिखा खूबसूरत लखनऊ
जिला जेल लखनऊ में बंद कैदी जावेद पाशा और रवीन्द्र जायसवाल के तमाम चित्रों ने खूब वाहवाही लूटी। दोनों के बनाए गए रूमी गेट, रेजीडेंसी, ला-मार्टिनियर कॉलेज, दिलकुशा, बड़ा इमामबाड़ा समेत दर्शनीय स्थलों को हर दर्शक घंटों तक उन्हें निहारता रहा। सजा काट चुके कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर जैनुल नवाब की चित्रकारी भी शौकीनों को अपनी ओर खींचती रही। इसके अलावा जिला जेल गाजियाबाद के मिथुन का टाइटेनिक और आगरा सेंट्रल जेल के मांगेराम के तमाम चित्रों को लोगों ने सराहा। गाजियाबाद के ही अजय, जिला जेल अलीगढ़ के यादराम, जिला जेल बांदा के बृजेश, सेंट्रल जेल वाराणसी के जलालुद्दीन की चित्रकारी भी काबिल-ए-तारीफ रही।
50 से 601 रुपये तक की पेंटिंग्स
प्रदर्शनी में लगी पेंटिंग्स को शौकीन वाजिब दामों में खरीद भी सकते हैं। डिप्टी जेलर संतोष वर्मा ने बताया कि इसके लिए साइज के अनुसार 50 रुपए से 601 रुपए तक की कीमत तय की गई है, जिसमें बंदी सुधार गृह पर आधारित जिला जेल बुलंदशहर के गुरुमुख सिंह की पेंटिंग सबसे महंगी 601 रुपए की है। ये आकार में भी सबसे बड़ी है।
कलाकारों और अकादमी कर्मचारियों को रोका
लाल बारादरी में प्रदर्शनी के उद्घाटन से पहले ही पुलिस और कारागार कर्मचारियों ने वीथिका परिसर में मीडिया कर्मियों, कलाकारों के लिए प्रवेश बंद करा दिया। इतना ही नहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तो कुछेक अकादमी कर्मचारियों को भी अंदर नहीं जाने दिया। हद तो तब हो गई जब सीएम के आगमन के बाद मुख्यद्वार का चैनल ही 10 मिनट से अधिक समय के लिए बंद कर दिया गया। अव्यवस्थाओं के बीच आला अधिकारियों की फौज सिर्फ मुख्य अतिथि और विभागीय मंत्री को ही वीथिकाओं में घुमाते रहे।