उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से टीजीटी, पीजीटी तथा प्रधानाचार्यों के पदों के चयन की जिम्मेदारी इंटर कॉलेजों में पढ़ाने वाले सहायक अध्यापक और प्रवक्ता को सौंपी गई है।
ताज्जुब है कि प्रधानाचार्यों के चयन की जिम्मेदारी ऐसे लोगों के हाथ में है जिनके पास उस पद पर आवेदन की ही योग्यता नहीं है।
बोर्ड में प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में दो सदस्यों की नियुक्ति की गई है जो इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं।
इससे पूर्व भी प्रदेश सरकार ने डीपी गौतम एवं मनोज यादव को चयन बोर्ड में बतौर सदस्य नियुक्ति किया था। यह सदस्य चयन बोर्ड नियमावली के मानक के अनुरूप नहीं है।
इनके पास पर्याप्त अनुभव की कमी के साथ ही प्रधानाचार्य पद पर आवेदन की भी योग्यता नहीं है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता सुरेश कुमार त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि इस समय चयन बोर्ड में पांच में चार सदस्य इंटर कॉलेजों में शिक्षक हैं।
इसमें सदस्य डीपी गौतम, मनोज यादव, ललित श्रीवास्तव एवं राम अवतार यादव इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं।
इसमें से तीन सदस्यों के पास तो स्वयं प्रधानाचार्य के पद पर चयन एवं आवेदन की योग्यता नहीं है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने इनके हाथ में शिक्षकों के साथ ही प्रधानाचार्य जैसे महत्वपूर्ण पद के चयन की जिम्मेदारी सौंप दी है।
त्रिपाठी ने ऐसे सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की स्थिति में भ्रष्ट लोगों के खिलाफ आंदोलन चलाने का निर्णय किया है।