पंत स्टेडियम में कुश्ती का अभ्यास करते खिलाड़ी। संवाद
सुल्तानपुर। शहर का पंत स्पोर्ट्स स्टेडियम अब जिले की कुश्ती प्रतिभाओं को तराशने का मुख्य केंद्र बन गया है। यहां अखाड़े में सुबह-शाम पसीना बहाने वाले युवा पहलवान न केवल दांवपेच सीख रहे हैं, बल्कि अपनी मेहनत के दम पर सेना, पुलिस और रेलवे जैसे विभागों में जगह भी बना रहे हैं।
स्टेडियम में कुश्ती के लिए विशेष अखाड़ा बनाया गया है, जहां कोच राम नरेश नए खिलाड़ियों को कुश्ती की तकनीक सिखाते हैं। नए सत्र में अब तक दस से अधिक युवाओं ने दाखिला लिया है। खास बात यह है कि पुराने और अनुभवी पहलवान भी यहां आकर नए खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करते हैं।
क्रीड़ाधिकारी राजेश सोनकर ने बताया कि यहां से प्रशिक्षण लेकर कई खिलाड़ियों ने सफलता के झंडे गाड़े हैं। रमजान पहलवान (पहले रेलवे व अब वन विभाग), सगीर पहलवान (पुलिस) और सत्येंद्र जायसवाल (सीआरपीएफ) में सेवाएं दे रहे हैं। यशवंत पहलवान राष्ट्रीय स्तर के कोच हैं, जबकि बाबुल पहलवान ने नेशनल प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई है। वहीं महिला पहलवानों में अदिति सिंह और सुनैना सरोज का चयन स्पोर्ट्स हॉस्टल के लिए हुआ है, जबकि तनु यादव इस साल कैंप के लिए चुनी गई हैं। जबकि मो. अयाज, अहसान, शशांक गुप्ता और आशुतोष उपाध्याय ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।
मेहनत और अनुशासन से बन रहा भविष्य
कोच राम नरेश के अनुसार, कुश्ती में ऊंचाइयों को छूने के लिए नियमित अभ्यास, संतुलित खानपान और कड़ा अनुशासन सबसे जरूरी है। स्टेडियम में खिलाड़ियों को केवल दांवपेच ही नहीं सिखाए जाते, बल्कि उनकी शारीरिक फिटनेस पर भी विशेष जोर दिया जाता है। इसी सटीक प्रशिक्षण का परिणाम है कि यहां के पहलवान खेल के मैदान से लेकर सरकारी नौकरियों तक में सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं।