विधानसभा चुनाव में अपनी हिस्सेदारी व जवाबदेही तय करने को लेकर महिलाएं सजग हो गई हैं। वे अपने अधिकार के साथ कर्तव्यों को लेकर भी सतर्क हैं। सोमवार को शहर के गार्डन व्यूू होटल में अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘संवाद’ कार्यक्रम में आधी आबादी का दर्द पिछड़ेपन व उपेक्षा को लेकर छलक पड़ा। आधी आबादी ने स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास, रोजगार के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपना नजरिया साफ किया।
महिलाओं ने कहा कि उन्हें ऐसे जनप्रतिनिधि को चुनना होगा जो महिला सुरक्षा पर ध्यान दे। बालिकाओं की उच्च शिक्षा के लिए सही व्यवस्था होनी चाहिए। बेसिक शिक्षा के पिछड़ेपन को लेकर महिलाओं ने चिंता जताई। कहा कि इसमें निरंतर सुधार की जरूरत है। आपराधिक छवि के नेताओं को नकार देने का संकल्प महिलाओं ने लिया। कहा कि हमें शिक्षित, सर्व सुलभ और स्थानीय समस्याओं की जानकारी रखने वाले प्रतिनिधि को ही चुनना होगा।
कई महिलाओं ने सही प्रत्याशी के चयन के लिए जनप्रतिनिधियों को चौपाल में बुलाकर उनसे मुद्दे पर चर्चा किए जाने की बात कही। महिलाओं के साथ भेदभाव करने वाले नेताओं को नकारने पर महिलाओं ने जोर दिया। शिक्षा विभाग से जुड़ी महिलाओं ने सरकार की ओर से पेंशन बंद किए जाने पर रोष जताया। सवाल उठाया कि जब नेताओं को पेंशन मिल सकती है तो शिक्षकों को पेंशन क्यों नहीं दी जा रही है।