गौरीगंज। लूट की मुखबिरी के आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। लोग जहां मन में उठ रहे सवाल का जवाब जानना चाहते हैं वहीं पुलिस के पास इसका कोई सटीक जवाब नहीं है।
पुलिस के अनुसार पुलिस की पकड़ में आने से पहले ही उसने जहर खा लिया था। उसके जहर खाने की बात लोगों के गले नहीं उतर रही है।
अंतू थाने के बिराहिमपुर बरबंडा निवासी व्यवसायी सत्य प्रकाश शुक्ल की पुलिस हिरासत में हुई मौत ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में व्यवसायी के आमाशय में जहर मिलने की पुष्टि हुई है।
जिले के पुलिस अधिकारी व्यवसायी की मौत के बाद से ही इसी बात का अंदेशा जता रहे थे। व्यवसायी की मौत के बाद मीडिया के लिए एसपी डॉ. ख्याति गर्ग की ओर से जारी एक वीडियो में कहा गया था कि मृतक पर 2008 में वाहन चोरी का एक मुकदमा लखनऊ जिले में दर्ज था।
बैंक कर्मी से हुई 26 लाख की लूट के मामले में भी उसने मुखबिरी की थी। पुलिस के अनुसार व्यवसायी सत्य प्रकाश आपराधिक विचारधारा का था। सवाल उठता है कि यदि सत्य प्रकाश आपराधिक विचारधारा का था तो उसे लूट के मामले में फंसने की आशंका मात्र पर जहर खाकर जान देने जैसा कदम क्यों उठाना पड़ा।
व्यवसायी की पुलिस हिरासत में हुई मौत में एक सवाल यह भी है कि आखिर उसे जहर कब और कैसे मिला। पुलिस की थ्योरी है कि उसने पुलिस की पकड़ में आने से पहले ही जहर खा लिया था।
यदि ऐसा था तो पुलिस को व्यवसायी के घर से 20 किलोमीटर दूर स्थित पीपरपुर थाने पहुंचने तक रास्ते में इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। यदि उसने पुलिस की पकड़ में आने से पहले जहर नहीं खाया तो बाद मेें उसे जहर कैसे मिल गया।
एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने कहा कि व्यवसायी को पुलिस पकड़ कर नहीं लाई थी। पुलिस के बुलाने पर वह दोनों ों के साथ थाने आया था। संभावना है कि उसने घर से ही कोई जहरीला पदार्थ खा लिया हो। उसने जहर क्यों खाया व उसे जहर कहां से मिला इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही पता चल सकेगा।
एसपी ने बताया कि व्यवसायी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सुरक्षित रखे गए विसरा को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेज दिया गया है। जांच में यह बात पता चल सकेगी कि व्यवसायी के आमाशय में मिला जहरीला पदार्थ कौन सा और कितनी मात्रा में था।