चैत्र माह अभी बीता नहीं है लेकिन अप्रैल में पड़ रही प्रचंड गर्मी कहर ढाने लगी है। लोग अभी से ही जेठ माह में होने वाली तपिश की मार के बारे में सोचकर डर रहे हैं। चिलचिलाती धूप लोगों के पसीने छुड़ा रही है। सुबह नौ बजे के बाद से ही धूप बर्दाश्त नहीं हो रही है। इसमें स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हैं।
तापमान जिस समय सबसे अधिक होता है, बच्चे भी उसी समय धूप में स्कूल से घर जाते हैं। राजस्थान की ओर से चल रही पछुआ हवाओं के सूर्य की किरणों से टकराने से जिले में तापमान बढ़ने का सिलसिला दिन-ब-दिन जारी है।
नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के मौसम पर्यवेक्षक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि वर्ष 2007 से 2015 के दौरान अप्रैल माह में अधिकतम तापमान दो वर्षों में 43.0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है। 2008 व 2010 में अप्रैल माह में अधिकतम तापमान 43.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।
जबकि अन्य वर्षों में इतना तापमान नहीं पहुंचा था। इस वर्ष अप्रैल में ही इतनी अधिक गर्मी पडने के पीछे मुख्य वजह तेज पछुआ हवाओं का चलना है। वे बताते हैं कि राजस्थान की ओर से शुष्क पछुआ हवा चलने से वे सीधे सूर्य की किरणों से टकराती हैं। इस वजह से सोलर रेडिएशन ज्यादा हो जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एएन सिंह ने बताया कि गर्मी के सीजन में बचाव ही बेहतर उपाय है। गर्मी में सिर पर गमछा या फिर टोपी पहनकर बाहर निकलना चाहिए। नींबू पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं और मोटा कपड़ा पहनें, जिससे हाथ पूरी तरह से ढका हो। बच्चों के लिए भी इन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।