सुलतानपुर। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शुक्रवार को साहित्य चिंतन की भारतीय परंपरा गोष्ठी आयोजित हुई। संबोधित करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. इंद्रमणि कुमार ने कहा कि भारत को सांस्कृतिक स्तर पर गुलाम बनाने के लिए हमारे ज्ञान परंपरा को नष्ट किया गया। हम औपनिवेशिक दासता से मुक्त भले ही हो गए हों, लेकिन औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होना अभी बाकी है।
असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा ने विश्व की प्रगति और विकास का आधार खड़ा करने के साथ ही शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शब्द, ध्वनि और अर्थ को लेकर भारतीय परंपरा में बहुत ही गूढ़ और प्रमाणिक बातें कही गई हैं। एमए तृतीय सेमेस्टर के छात्र आशुतोष पांडेय ने कहा कि वैदिक और लौकिक संस्कृत का साहित्य भारतीय परंपरा का बखान करता है। एमए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा अर्चना यादव ने कहा कि हिंदी साहित्य में इतिहास लेखन की परंपरा काफी पुरानी है। अध्यक्षता एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रंजना पटेल व आभार ज्ञापन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विभा सिंह ने किया।