पिछड़े गांवों को समग्र लोहिया गांव के रूप में चयनित कर उसे विकसित करने की योजना अभी अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है। प्रतिवर्ष गांवों का चयन कर कराए जा रहे विकास कार्य अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। हालांकि चयन वर्ष में कुछ हद तक सड़क, लाइट, गली, पानी निकासी, विद्यालय की समस्याएं दूर हो जा रही हैं लेकिन बाद में स्थिति पुरानी जैसी होने लगी है।
बसपा सरकार में प्रत्येक वर्ष चयनित अंबेडकर गांव हों या फिर सपा सरकार में चयनित हो रहे समग्र लोहिया गांव। इतना जरूर है कि अन्य गांवों की अपेक्षा इसमें थोड़ा बदलाव आया है। ग्रामीण व गांव प्रधान भी किए गए विकास को कम के साथ उसकी देखरेख की जरूरत प्रतिवर्ष बताते हैं। ऐसे में समग्र गांव के चयन के बीच स्मार्ट गांव के समुचित विकास पर भी लोग संशय जता रहे हैं।
प्रत्येक वर्ष 28 समग्र लोहिया गांवों का चयन
सूबे की सरकार अति पिछड़े गांवों के विकास के लिए प्रत्येक वर्ष 28 समग्र लोहिया गांव का चयन करा रही है। चयन के बाद गांवों में मुख्यमंत्री के 87 विकास कार्यक्रम गांवों में चलाए जा रहे हैं। इसमें सड़क, संपर्क मार्ग, गलियों में सीसी रोड, पक्की नालियां, आवास निर्माण, पेंशन, विद्युतीकरण, मनरेगा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि योजनाएं शामिल हैं। इस पर प्रत्येक वर्ष एक गांव पर एक करोड़ रुपया से अधिक खर्च हो रहा है। अधिकारी गांव का निरीक्षण कर चौपाल भी लगा रहे हैं। इसके बाद भी समस्याएं खत्म नहीं हो रही हैं।
कुपोषितों का आंकड़ा बढ़ा
कुपोषण को दूर करने के लिए अधिकारियों ने जिले के 140 गांवों को गोद लिया है। गांवों को अंगीकृत करने वाले अधिकारी गांवों का निरीक्षण कर योजनाओं की जानकारी ले रहे हैं। कुपोषित बच्चों का परीक्षण भी चल रहा है। करीब आठ माह से चल रहे कार्य के बाद भी अभी स्थिति में सुधार नहीं आया है। कुपोषितों का आंकड़ा घटने के बजाय बढ़ गया है।
योजना अच्छी लेकिन बराबर ध्यान देने की जरूरत
मोतिगरपुर विकास खंड के खनुहट ग्राम प्रधान रत्नाकर सिंह का कहना है कि स्मार्ट गांव बनाने की केंद्र सरकार की योजना अच्छी है लेकिन यह समग्र लोहिया गांव या फिर अंबेडकर गांव योजना के तरह नहीं संचालित होनी चाहिए। स्मार्ट गांव ऐसा विकसित होना चाहिए कि चयनित गांव में सभी सुविधाएं हों। कुड़वार विकास खंड के हरखपुर ग्राम प्रधान राम स्वारथ यादव का कहना है कि स्मार्ट गांव बनाने की केंद्र सरकार की सोच अच्छी है। पर, सरकार की सोच की तरह चयनित गांव का विकास भी होना चाहिए। विकास के बाद गांव शहर जैसा दिखे भी। साथ ही साथ उस पर सरकार को निरंतर ध्यान देना होगा। अन्यथा कुछ वर्ष बाद चयनित गांवों का हश्र समग्र लोहिया व अंबेडकर गांवों की तरह होगा।
बुनियादी सुविधाओं की जरूरत
कुड़वार निवासी राम सूरत तिवारी का कहना है कि स्मार्ट सिटी की तरह स्मार्ट गांव के चयन का कदम केंद्र सरकार का अच्छा है। इससे गांवों का विकास होगा। लोग गांव में भी रहना पंसद करेंगे। मोतिगरपुर के पारसपट्टी गांव निवासी राजेश वर्मा का कहना है कि अब गांवों के विकास की जरूरत है। सबसे ज्यादा ध्यान सरकार को बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं पर देना होगा। इसके अभाव में स्मार्ट गांव का सपना अधूरा होगा।
चयनित गांवों की बदली तस्वीर
मुख्य विकास अधिकारी श्रीकांत मिश्र ने का कहना है कि समग्र लोहिया गांव के विकास में कोई कोर कसर नहीं छूट रही है। चयनित गांवों में सभी योजनाओं को लागू किया गया है और विकास कराया जा रहा है। विकास से गांवों की तस्वीर बदली है।