गर्मी के मौसम में हरी सब्जियों की बिक्री को लेकर किसान परेशान हैं। उम्मीद के अनुरूप उत्पादन और बाजार भाव कम मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। एक माह के भीतर हरी सब्जियों के भाव गिरने से किसानों को मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि सिंचाई की समस्या के चलते सब्जियों की खेती प्रभावित हुई है।
जिले में कद्दू, लौकी, लोबिया, खीरा, ककड़ी, तरोई, भिंडी व करेला की खेती प्रमुखता से की जाती है। इन सब्जियों की खेती की तैयारियां इस साल समुचित रूप से किसान नहीं कर पाए। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश स्थानों पर नहरों व राजकीय नलकूपों से सिंचाई की जाती है। किसानों का कहना है कि नहरों में पर्याप्त पानी न होने के चलते सिंचाई प्रभावित हुई।
जलस्तर गिरने से अधिकांश नलकूपों ने पानी देना बंद कर दिया है। उद्यान विभाग के मुताबिक इस वर्ष लौकी की खेती 11.6 हेक्टेयर में की गई है। खीरा की खेती तीन हेक्टेयर में हुई है। वहीं तरोई का औसत 1.8 हेक्टेयर रहा। जनपद के नौ हेक्टेयर में करेला की खेती की गई है। जिले के भदैंया, कुड़वार, लंभुआ, दोस्तपुर, मोतिगरपुर, दूबेपुर, कादीपुर व कूरेभार ब्लॉक के किसानों ने अनुदानित बीज पर इन सब्जियों की खेती की है।
किसानों का कहना है कि यदि समय से खेतों की सिंचाई हो गई होती तो उम्मीद के अनुरूप अब तक मुनाफा मिलता। स्थिति यह है कि देर से पैदावार होने के चलते सब्जियां मार्केट में अपेक्षा के हिसाब से बिक नहीं पा रही हैं।